Dehradun News: चिंताजनक...कम उम्र में मासिक धर्म घटा रहा लड़कियों का कद, कैंसर का भी है अधिक खतरा
कम उम्र में मासिक धर्म कई तरह की स्वास्थ्य चुनौतियों को उत्पन्न करता है। जिला चिकित्सालय में हर सप्ताह आठ से 10 वर्ष की दो बच्चियां शिकायत लेकर पहुंच रहीं हैं।
विस्तार
कम उम्र में मासिक धर्म से लड़कियों का कद छोटा हो रहा है। इनमें कैंसर का भी अधिक खतरा देखने को मिलता है। जिला चिकित्सालय के महिला एवं प्रसूति रोग विभाग की ओपीडी में हर सप्ताह इस तरह की परेशानी से जूझने वाली दो बच्चियां पहुंच रही हैं। चिकित्सकों ने इसके प्रति खासी चिंता जाहिर की है।
विशेषज्ञों के मुताबिक कम उम्र में मासिक धर्म कई तरह की स्वास्थ्य चुनौतियों को उत्पन्न करता है। इससे जूझने वाली बच्चियों की जीवनशैली पूरी तरह प्रभावित हो रही है। ऐसे में उन्हें मानसिक पीड़ा से भी जूझना पड़ रहा है जो मासिक धर्म की प्रवृत्ति को और अधिक गंभीर कर रही है।
शरीर की हड्डियां कमजोर होने लगती
जिला चिकित्सालय की वरिष्ठ महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मेघना असवाल के मुताबिक आठ से 10 वर्ष आयु वर्ग की बच्चियों में मासिक धर्म शुरू हो रहा है। इसके पीछे का मुख्य कारण एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का असंतुलित होना है।
इस उम्र मासिक धर्म के दौरान जब बड़ी मात्रा में रक्तस्राव होता है तो ऐसी स्थिति में शरीर की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। इससे शरीर का संपूर्ण विकास अवरोध होता है। यही कारण है कि इससे जूझने वाली बच्चियों का कद छोटा हो रहा है।
बच्चियां में कई गंभीर बीमारियों का भी खतरा बढ़ा
डॉ. मेघना बताती हैं कि कम उम्र में मासिक धर्म की समस्या सिर्फ कद छोटा करने तक सीमित नहीं है। इससे जूझ रही बच्चियों में कई गंभीर बीमारियों का भी खतरा होता है जो जानलेवा साबित हो सकती हैं। इस तरह की बच्चियों में ब्रेन, ओवेरियन और एड्रेनल ट्यूमर का खतरा होता है जिसे कैंसर के रूप में भी पहचाना जाता है। इसके अलावा इनमें मेनिनजाइटिस और एन्सेफलाइटिस का भी खतरा बढ़ जाता है। इसमें वे मस्तिष्क संबंधी कई तरह की समस्याओं से जूझती हैं। बताया कि इन परेशानियों से जूझ रही बच्चियां मानसिक पीड़ा से भी जूझती हैं। इसकी वजह से मासिक धर्म की प्रवृत्ति और भी गंभीर हो जाती है जो अधिक रक्तस्राव की वजह बनती है।
यह हैं मुख्य कारण
1- हार्मोनल असंतुलन
2- तनाव
3- अचानक वजन बढ़ना या कम होना
4- थायराइड
5- दवाओं का सेवन
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ये हैं उपाय
1- ऐसी स्थिति में अभिभावक बच्चियों से खुलकर बात करें
2- उनके खाने-पीने पर विशेष ध्यान दें
3- समय-समय पर काउंसलिंग कराएं