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शहीद मेजर भूपेन्द्र कंडारी के नाम से बनेगा स्मृति द्वार- सैनिक कल्याण मंत्री
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उत्तराखंड के लाल, देहरादून निवासी अमर शहीद मेजर भूपेंद्र कंडारी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी शहीद मेजर भूपेंद्र कंडारी को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके नाम से शहीद द्वार बनाने की घोषणा की।
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य वीरों की, देशभक्तों की भूमि है। राज्य के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि राज्य के समस्त 1734 शहीदों को सामाजिक सम्मान दिलाने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इन शहीदों के आंगन से पवित्र माटी एकत्रित कर सैन्यधाम में लाई गई। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से भव्य राष्ट्रीय स्मारक बनाया गया है। उसी तर्ज पर राज्य के पांचवें धाम अर्थात सैन्यधाम का निर्माण देहरादून में करवाया जा रहा है। कहा कि देश के प्रथम सीडीएस स्व. विपिन रावत के नाम पर सैन्यधाम का मुख्य प्रवेश द्वार बनाया जा रहा है। शहीद कंडारी के पिता ने सैनिक कल्याण मंत्री से आग्रह किया कि अग्निपथ योजना के तहत भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं को भर्ती के लिए प्रशिक्षण दिए जाने की व्यवस्था की जाए। इस पर मंत्री ने कहा कि भर्ती पूर्व प्रशिक्षण की व्यवस्था पूर्व से ही की जा रही है।
विदित है कि शहीद मेजर कंडारी राजपूताना राईफल्स में थे। वर्ष 2003 में राजौरी में आतंकवादियों से एक मुठभेड़ के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए थे। शहीद को भारत सरकार द्वारा मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित किया गया। इस दौरान शहीद के पिता गजेंद्र सिंह कंडारी, पूनम नौटियाल, सुरेंद्र राणा, अनुज रोहिला, अशोक गुप्ता आदि मौजूद थे।
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सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य वीरों की, देशभक्तों की भूमि है। राज्य के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि राज्य के समस्त 1734 शहीदों को सामाजिक सम्मान दिलाने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इन शहीदों के आंगन से पवित्र माटी एकत्रित कर सैन्यधाम में लाई गई। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से भव्य राष्ट्रीय स्मारक बनाया गया है। उसी तर्ज पर राज्य के पांचवें धाम अर्थात सैन्यधाम का निर्माण देहरादून में करवाया जा रहा है। कहा कि देश के प्रथम सीडीएस स्व. विपिन रावत के नाम पर सैन्यधाम का मुख्य प्रवेश द्वार बनाया जा रहा है। शहीद कंडारी के पिता ने सैनिक कल्याण मंत्री से आग्रह किया कि अग्निपथ योजना के तहत भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं को भर्ती के लिए प्रशिक्षण दिए जाने की व्यवस्था की जाए। इस पर मंत्री ने कहा कि भर्ती पूर्व प्रशिक्षण की व्यवस्था पूर्व से ही की जा रही है।
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विदित है कि शहीद मेजर कंडारी राजपूताना राईफल्स में थे। वर्ष 2003 में राजौरी में आतंकवादियों से एक मुठभेड़ के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए थे। शहीद को भारत सरकार द्वारा मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित किया गया। इस दौरान शहीद के पिता गजेंद्र सिंह कंडारी, पूनम नौटियाल, सुरेंद्र राणा, अनुज रोहिला, अशोक गुप्ता आदि मौजूद थे।
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