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चरित्रहनन की राजनीति पर विश्वास नहीं करताः मेयर

Sat, 13 Feb 2016 02:12 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 13 Feb 2016 02:12 PM IST
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mayor does not believe in the politics of character assassination

देहरादून में शुक्रवार को मेयर विनोद चमोली ने शहरी विकास, शहर की गंदगी, नगर निगम की अक्षमता, भ्रष्टाचार, अमृत योजना में मनमानी के आरोपों पर कहा कि वह सकारात्मक रूप से काम करना चाहते हैं

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वह व्यक्तिगत हमले और चरित्रहनन की राजनीति पर विश्वास नहीं करते। उनका लक्ष्य दून का विकास है और इसमें वह सहयोग लेने और करने को तैयार हैं। हालांकि वह अंतिम सांस तक लड़ेंगे।
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विधायक राजकुमार के संपत्ति की जांच संबंधी आरोप पर उनका कहना था कि वह हर जांच के लिए तैयार हैं। हाउस टैक्स मसले पर वह जल्द मुख्यमंत्री से मिलेंगे। इस पर उनका स्पष्ट विचार मांगेंगे।
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अगर वह हाउस टैक्स लगाते हैं तो उसका स्वागत किया जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं करते हैं तो फिर उनको कहेंगे कि वह विधायकों को कुछ भी बोलने से रोकें।

मन्नूगंज नाले पर मेयर बोले कि अगर विधायक राजकुमार को शासन से स्वीकृति मिल चुकी है तो फिर नगर निगम से एनओसी लेने की क्या जरूरत? चमोली ने कहा कि कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल को अपने विभाग में चल रही महत्वपूर्ण गतिविधियों की जानकारी न होना आश्चर्यजनक है।

उन्हें पता होना चाहिए कि धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में नगर निगम के 11 वार्ड आते हैं। बंदरों के विषय में उन्होंने कहा कि यह मामला वन्य जीव नियमों-कानूनों से जुड़ा है इसलिए इसमें नगर निगम की सीमित भूमिका है। हालांकि आवारा कुत्तों के मामले में निगम की सीमित उपलब्धियां रही हैं।

गंदगी के आरोपों को सीमित रूप से स्वीकारते हुए मेयर ने कहा कि यह सच है कि दून गंदा हो रहा है। लेकिन क्या इसके लिए वही दोषी हैं? नगर निगम का प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह से शासन के अधीन है। इसलिए उनकी भूमिका सीमित है। उन्होंने कहा कि सफाई अभियान में वह कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल, विधायक उमेश शर्मा काऊ और राजकुमार के साथ सहयोग करेंगे। उनसे सहयोग की भी अपेक्षा करेंगे।

विधायक शर्मा के आरोपों पर मेयर ने कहा कि उनकी बात सौ फीसदी सही है। अगर मेयर को अधिकार नहीं मिले हैं तो सरकार ही इसके लिए जिम्मेदार है। जब तक सरकार 74वें संवैधानिक संशोधन को लागू नहीं करती तब तक मेयर के सीमित अधिकार ही रहेंगे। लेकिन अधिनियम को लागू तो प्रदेश सरकार को ही करना है।

नगर पालिका- निगम अधिनियम, 1959 की बातें जस की तस हैं। तब दस लाख रुपये की कीमत आज के दस करोड़ के बराबर होती थी। नगर निकायों को प्रशासनिक व वित्तीय तौर पर शक्तिसंपन्न नहीं बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेयर के प्रशासनिक व वित्तीय अधिकारों के लिए विधायक शर्मा को मुख्यमंत्री से बातचीत करनी चाहिए।

इस बाबत अमर उजाला ने विधायक व संसदीय सचिव उमेश शर्मा काऊ के प्रतिनिधि को फोन मिलाया लेकिन उनका उत्तर नहीं मिला। इसलिए उनसे बातचीत नहीं हो पाई। बीते दिन भी उनकी तरफ से कोई बयान नहीं आया था।

नकारात्मक रवैया अपनाते रहे हैं मेयर: अग्रवाल
देहरादून के कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल ने कहा कि वह तो देहरादून के विकास के लिए जुटे हैं। मेयर ही नकारात्मक रवैया अपनाते रहे हैं। वह निगम के कामों में बिना वजह हस्तक्षेप नहीं करते। लेकिन नगर के विकास से समझौता नहीं करेंगे। नगर निगम के स्तर पर अगर उनके क्षेत्र के साथ अन्याय होगा तो वह लड़ाई करेंगे।

अपने सभी वार्डों के विकास के लिए वह दल और पार्टी से ऊपर उठकर काम कर रहे हैं। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट वाला मसला दूसरी तरह का है। बंदरों से आतंक से मुक्ति दिलाने का मामला है तो वह मेयर और नगर निगम को सहयोग देने को तैयार हैं। मेयर को चाहिए कि वह संवाद रखें। कम्युनिकेशन गैप बनाने से फायदा नहीं होता।

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होटल मालिकों-मॉल स्वामियों के एजेंट हैं मेयर : राजकुमार
देहरादून। विधायक व संसदीय सचिव राजकुमार ने कहा कि वह शांत बैठने वालों में से नहीं हैं। मेयर के आरोपों का जवाब वह जल्द तथ्यों के आधार पर देंगे। मेयर के संरक्षण में बड़े-बड़े होटल मालिकों, मॉल स्वामियों ने अरबों रुपये कीमत की नगर निगम की भूमि पर कब्जा कर रखा है।

वह कब्जा सम्राट नहीं बल्कि गरीबों के सेवक हैं। वह आज भी खुद को जमीनी कार्यकर्ता मानते हैं। इसलिए गरीबों के हितों के मसले पर उत्पीड़न करने वालों से टकराते हैं। कमजोर वर्ग का होने से मेयर उन पर (विधायक) पर हमला कर रहे हैं। लेकिन वह ईमानदार कार्यकर्ता होने के कारण मेयर के कारनामों को बेनकाब करेंगे।

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यह कहा था विधायक उमेश शर्मा काऊ ने
दून में रायपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक व संसदीय सचिव उमेश शर्मा काऊ ने कहा था कि नगर निगम बोर्ड को दस लाख रुपये से अधिक का काम कराने का अधिकार ही नहीं है। अगर काम करा लिया जाए तो बोर्ड बैठक बुलाकर सदस्यों से अनुमति लेनी आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया था कि मेयर दस लाख रुपये से अधिक का काम करा वित्तीय अनियमितता बरत रहे हैं।

विधायक का कहना था कि मेयर के पास न वित्तीय अधिकार हैं और न ही प्रशासनिक। सारे हकहकूक नगरायुक्त के पास होते हैं। इसलिए मेयर कानून तोड़ रहे हैं।

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