भगवान शिव की महिमा में महेश ने भुलाई दुनिया
तेरे नूर-नजर से नजर नहीं हटती, तेरे श्री चरणों में मेरी हस्ती है बसती, एक तेरा हाथ जो पकड़ा है बाबा, किसी और हाथ की जरूरत ही नहीं पड़ती। एक भजन की ये चंद लाइनें हरियाणा के पैंतीस वर्षीय महेश यादव पर सटीक बैठती है।
जिन्होंने शिव की भक्ति में दुनिया को भुला दिया है। उन्होंने आजीवन विवाह न करने का फैसला किया है। यह फैसला उन्होंने इसलिए किया ताकि कोई शिव की भक्ति में बाधा न बने। वे चार बार गंगोत्री, गोमुख से चार बार जल लेकर पैदल हरियाणा की यात्रा कर चुके हैं।
हरियाणा के जिला रेवाड़ी गांव रामपुरा के रहने वाले महेश यादव इस बार भी चारधाम यात्रा में जाने के लिए पहले की तरह बेहद उत्सुक हैं। कहते हैं कि बाबा के दर पर जाना हर इंसान के लिए एक नया जीवन पाने के समान है। महेश बाबा भोले भंडारी की भक्ति को अपने जीवन का मुख्य उद्देश्य मानते हैं।
शिव की भिक्त में समर्पित
इसी उद्देश्य के चलते उन्होने ताउम्र विवाह न करने का फैसला लिया है। वह अपनी भक्ति के बीच किसी दूसरे बंधन को स्वीकार नहीं करना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने परिवार से भी शादी कराने के लिए मना किया है। महेश शिव भक्ति में इस कदर लीन हैं कि उन्होंने वर्ष 2005-06 में गोमुख से जल भरकर 25 दिन की पैदल यात्रा की थी।
इसके अलावा वर्ष 2009-10 में उन्होंने गंगोत्री से जल भर के 22 दिन तक पैदल चलने के बाद अपने गांव रामपुरा जल लेकर पहुंचे। गांव पहुंचने के बाद उन्होंने गांव के कल्याण के लिए शिव मंदिर में जलाभिषेक किया। इस बार महेश अपने दोस्त संजय प्रसाद के साथ चारधाम यात्रा पर जा रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण वे इस बार गाड़ी से चारधाम यात्रा पर जा रहे हैं।
बताते हैं कि उनकी मन की इच्छा है गोमुख से जल भर कर पैदल यात्रा कर गुजरात के सोमेश्वर धाम शिव मंदिर में जलाभिषेक करें। परिवार के बारे में महेश ज्यादा कुछ नहीं बताते है। बताया कि वे एक प्राइवेट कंपनी में काम करते है। जो कुछ उन्हें कंपनी से वेतन मिलता है, उसे वह शिव भक्ति में समर्पित कर देते है।