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नहीं हो पाया लछमा और गुसांई का मिलन, अधूरी रह गई दोनों की प्रेम कहानी

Wed, 14 Mar 2018 07:43 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर गढ़वाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर गढ़वाल Updated Wed, 14 Mar 2018 07:43 PM IST
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 love story of lachma & gusain
theater
लछमा और गुसांई की प्रेम कहानी अधूरी रह गई। दोनों के मिलन की आस पूरी नहीं हो पाई। राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव जश्न-ए-विरासत में लछमा और गुसांई की अधूरी प्रेम कथा ‘कोसी का घटवार’ नाटक का मंचन किया गया। कथानक के अनुसार, जीवन की विपरीत परिस्थितियों में दोनों अलग हो जाते हैं। सालों बाद वह मिलते हैं, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
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चौरास प्रेक्षागृह में मंगलवार शाम शेखर जोशी की प्रेम कहानी ‘कोसी का घटवार’ नाटक का मंचन हुआ। डा. अजित पंवार के निर्देशन में गढ़वाल विश्वविद्यालय के लोक कला एवं निष्पादन केंद्र के कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति से नाटक में चार चांद लगा दिए।
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यह नाटक एक विशेष प्रेम कथा पर आधारित है, जिसमेें प्रेम अपनी परिणीति तक कैसे पहुंचे, इस द्वंद्व को दिखाया गया। उत्तराखंड की पृष्ठभूमि पर आधारित यह नाटक लछमा व गुसांई दो युवाओं के दिलों में पनपती प्रेम कहानी से शुरू होता है।
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प्रेम कहानी फ्लैश बैक में शुरू होती है। यह प्रेमी जोड़ा प्रेम के क्षणों को पहाड़ों में, नदियों में, जंगलों में भरपूर जीता है, लेकिन उनके एक होने में गुसाईं का अनाथ होना बाधा बन गया और लछमा किसी दूसरे की हो गई। इसी बीच गुसांई फौज में भर्ती हो जाता है।

फौज से पेंशन आने के बाद गुसाई गांव में एक चक्की (घट) खोलता है। एक दिन लछमा उसकी चक्की में गेहूं पिसवाने आती है। दोनों के बीच बातचीत होती है।

लछमा बताती है कि पति की मौत हो गई है और उसका एक बेटा है। दोनों पुरानी यादों में खो जाते हैं। नाटक के अंत में गुसांई लछमा के थेले में थोड़ा अधिक आटा डालकर उसे विदा कर देता है।

नाटक के मुख्य किरदार
गुसांई-मनोज यादव, लछमा-नितिक्षा तिवार, सूत्रधार-विकास राजपूत, संगीत-प्रकाश, गंगा राम व संजय पांडेय, सहयोग-आशुतोष द्विवेदी, अमित टम्टा, ललित धनाई व महफूज आलम


प्रेक्षागृह में फोटोग्राफर प्रशांत बडोनी की फोटो प्रदर्शनी भी लगाई गई है। जो दर्शकों को आकर्षित कर रही है। प्रशांत ने अपने कैमरे में प्रकृति के कई दुर्लभ पल कैद किए हैं। प्रदर्शनी में उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी कई तस्वीरें भी लोगों को भा रही है।

प्रेक्षागृह की गैलरी में लगी फोटो प्रदर्शनी में हर्षिल की वादियां, कुमाऊं की घाटियां, जौनसार व हिमाचल की कई तस्वीरों को लोग खूब पसंद कर रहे है।

 
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