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Lok Sabha Election: दावे...वादे...सब बेदम, राजनीति में बेटियां अब भी ‘पराया धन’, उत्तराखंड में ऐसी है तस्वीर

Mon, 08 Apr 2024 10:58 AM IST
रेनू सकलानी विजय लक्ष्मी भट्ट, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
विजय लक्ष्मी भट्ट, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 08 Apr 2024 10:58 AM IST
सार

महिला अधिकार, सशक्तिकरण और महिलाओं से जुड़ी योजनाओं की बात जोरों से की जाती है लेकिन जब चुनाव मैदान में उतारने की बात आती है तो राजनीतिक दलों की प्राथमिकता बदल जाती है। राज्य की 40 लाख से अधिक महिला मतदाताओं को शायद अभी और इंतजार करना होगा।

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Lok Sabha election 2024 Uttarakhand Political parties behind in giving tickets to women
मतदाता

विस्तार

लोकसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दल महिलाओं के अधिक से अधिक वोट लेने को जितने बेताब दिख रहे हैं, उनकी वैसी इच्छा या बेताबी उन्हें टिकट देने में नहीं दिखाई देती है। राज्य में कुल मतदाताओं में 48 फीसदी महिला मतदाता हैं, जो किसी को भी हराने या जिताने का दमखम रखती हैं, लेकिन राज्य की पांच लोकसभा सीटों पर 55 प्रत्याशियों में से सिर्फ चार ही महिलाएं हैं।

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साफ है कि राज्य की महिलाओं को सही मायने में अभी तक अपना हक नहीं मिल पाया है। राज्य की 40 लाख से अधिक महिला मतदाताओं को शायद अभी और इंतजार करना होगा। जहां तक राज्य की महिलाओं की राजनीतिक जागरूकता का मसला है तो यह देखा गया है कि पुरुष मतदाताओं की तरह राज्य की महिलाएं भी मतदान करने के प्रति काफी सजग रही हैं।
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सामाजिक और पर्यावरणीय सरोकारों से जुड़े आंदोलनों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही। इस कारण वे राजनीतिक मुद्दों की भी समझ रखती हैं। राज्य की 50 फीसदी पंचायतों का प्रतिनिधित्व महिलाओं के हाथों में है और वे कुशलतापूर्वक अपने दायित्व का निर्वहन कर रहीं हैं। लेकिन विधायिका के मोर्चे पर अपनी क्षमताओं और योग्यता के मामले में अभी वे राजनीतिक दलों में भरोसा नहीं बना पाई हैं। यही कारण है कि महिलाओं को बराबरी का हक देने का नारा बुलंद करने वाले राजनीतिक दल भी उन्हें प्रत्याशी बनाने से हिचक रहे हैं। इसकी तस्दीक लोकसभा सीटों पर उतरे प्रत्याशियों से हो रही है।
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अब तक तीन महिलाएं ही पहुंचीं लोकसभा
बता दें कि पहले लोकसभा चुनाव में टिहरी संसदीय सीट से कमलेंदुमती शाह निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीतने में सफल रहीं। इसके बाद नैनीताल सीट से ईला पंत और फिर राज्य गठन के बाद महज एक महिला माला राज्यलक्ष्मी शाह संसद पहुंच पाईं। सालों बाद भी महिलाओं को लोकसभा या राज्य विधानसभा में उनकी आबादी के अनुसार प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया।

राजनीतिक दलों ने किया परहेज
उत्तराखंड में महिला उम्मीदवारों पर दांव लगाने में प्रमुख दलों ने परहेज किया है। हालांकि महिला अधिकार, सशक्तिकरण और महिलाओं से जुड़ी योजनाओं की बात जोरों से की जाती है लेकिन जब चुनाव मैदान में उतारने की बात आती है तो राजनीतिक दलों की प्राथमिकता बदल जाती है। केवल टिहरी लोकसभा सीट इसका अपवाद है, जहां से प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा ने माला राज्यलक्ष्मी शाह पर दांव खेला है।  गढ़वाल सीट से पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया डेमोक्रेटिक ने सुरेशी देवी, सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया ने  रेशमा और अल्मोड़ा  से उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने किरन आर्या को मैदान में उतारा है।

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