Lok Sabha Election: उत्तराखंड में पूर्व सैनिकों के नाम पर सियासत तो खूब पर टिकट नहीं, वोट बैंक बन कर रह गए
भाजपा लोक सभा चुनाव से ठीक पहले शहीद सम्मान यात्रा निकाल चुकी है तो कांग्रेस की ओर से भी कई सैनिक सम्मेलन कराए जा चुके हैं। राज्य की सियासत में जिन पूर्व सैनिकों को मौका मिला उन्होंने खुद को साबित किया।
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सैन्य बहुल प्रदेश उत्तराखंड में सैनिक, पूर्व सैनिक और उनके परिवार राजनीतिक दलों के लिए वोट बैंक बनकर रह गए हैं। जिनके नाम पर सियासत तो खूब हो रही है, लेकिन चुनाव में उन्हें प्रतिनिधित्व दिए जाने का जब समय आया तो भाजपा, कांग्रेस हो या अन्य राजनीतिक दल सभी ने उनकी अनदेखी कर दी।
प्रदेश में करीब डेढ़ लाख से अधिक पूर्व सैनिक हैं। जबकि अन्य सशस्त्र बलों के पूर्व जवानों की संख्या 70 हजार से अधिक हैं। जिन पर भाजपा व कांग्रेस सहित अन्य दलों की नजर है। उन्हें लगता है कि यदि इस वोट को अपने पक्ष में कर लिया तो लोक सभा चुनाव में जीत हासिल करना आसान होगा, लेकिन अब जबकि चुनाव में उन्हें प्रतिनिधित्व दिए जाने की बारी आई तो अब तक घोषित तीन सीटों पर भाजपा, कांग्रेस के हाथ खाली हैं। हरिद्वार और पौड़ी से प्रत्याशी घोषित किए जाने हैं, लेकिन इन सीटों से भी पूर्व सैनिक बिरादरी से किसी नए चेहरे को उम्मीदवार बनाया जाए इसकी संभावना न के बराबर है।
पूर्व सैनिकों को रिझाने के लिए हुए कई कार्यक्रम
भाजपा और कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दल पूर्व सैनिकों को रिझाने के प्रयास करते रहे हैं। भाजपा लोक सभा चुनाव से ठीक पहले शहीद सम्मान यात्रा निकाल चुकी है तो कांग्रेस की ओर से भी कई सैनिक सम्मेलन कराए जा चुके हैं।
पूर्व फौजियों को मौका मिला तो खुद को साबित किया
राज्य की सियासत में जिन पूर्व सैनिकों को मौका मिला उन्होंने खुद को साबित किया। इनमें मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी (सेनि), लेफ्टिनेंट जनरल टीपीएस रावत (सेनि) और गणेश जोशी प्रमुख हैं। इन पूर्व फौजियों ने सेना से सेवानिवृत्ति के बाद सियासत में कदम रखा और उसकी ऊंचाइयों को छुआ। पूर्व फौजी गणेश जोशी वर्तमान में धामी सरकार में सैनिक कल्याण मंत्री हैं। मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। जबकि लेफ्टिनेंट जनरल टीपीएस रावत पूर्व कैबिनेट मंत्री हैं।
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सेना का हर पांचवां जवान उत्तराखंड से
सेना का हर पांचवां जवान उत्तराखंड से है। जिन्हें रिझाने के लिए भाजपा और कांग्रेस की ओर से कोई कोर कसर नहीं छोड़ी गई। भाजपा सरकार की ओर से देहरादून में सैन्यधाम का निर्माण किया जा रहा है। जबकि कांग्रेस भी पूर्व सैनिकों के लिए कई सम्मेलन और रैली करा चुकी है।