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उत्तराखंड: सीएम त्रिवेंद्र ने पीएम मोदी से मांगी ग्रीन जोन में पर्यटन गतिविधियां शुरू करने की अनुमति

Mon, 11 May 2020 10:42 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 11 May 2020 10:42 PM IST
सार

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सीएम त्रिवेंद्र ने दिए सुझाव
  • एमएसएमई को मिले राहत, कंटेनमेंट जोन से बाहर शुरू हों आर्थिक गतिविधियां

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Lockdown: CM trivendra singh rawat told to Pm modi for give permission Movement in Green Zone
सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने केंद्र सरकार से ग्रीन जोन में पर्यटन गतिविधियां शुरू करने की मांग की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई मुख्यमंत्रियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मुख्यमंत्री ने आर्थिक गतिविधियों को तेज करने के लिए कई सुझाव दिए।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में करीब ढाई लाख एमएसएमई उद्योग हैं, जिनसे लाखों लोगों को रोजगार मिलता है। इन्हें राहत देने के लिए विचार किया जाना चाहिए। प्रदेश में आवासीय विद्यालयों को खोलने की अनुमति प्रदान करने के साथ ही सीमित वित्तीय संसाधन एवं टैक्स कलेक्शन में हो रही कमी के कारण ऋण सीमा को 3 प्रतिशत से 4 प्रतिशत किया जाए। कंटेनमेंट जोन के बाहर आर्थिक गतिविधियों को अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि इस महामारी से होटल, रेस्टोरेंट तथा पर्यटन एवं परिवहन व्यवसाय सर्वाधिक प्रभावित हुआ है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के समय पर लिए गए साहसिक निर्णय से देश आज खुद को सुरक्षित महसूस कर रहा है।
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उन्होंने प्रधानमंत्री को अवगत करवाया कि लॉकडाउन के दौरान राज्य का कोई भी गरीब व्यक्ति भूखा नहीं सोया है। कोविड-19 की रोकथाम के लिए राज्य में लगभग 500 डाक्टरों की तैनाती की गई। राज्य के 13 जिलों में से 11 जिलों में आईसीयू, वेंटीलेटर एवं बाईपैप की व्यवस्था है। राज्य में कोरोना के मामले 45 दिनों में डबल हो रहे हैं तथा रिकवरी रेट 67.6 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि राज्य में 68 पॉजिटिव मामले हैं, जिनमें से 46 व्यक्ति स्वस्थ होकर घर लौट गए हैं।

मनरेगा में शामिल हो होम स्टे
मुख्यमंत्री ने केेंद्र से मनरेगा के तहत संचालित होने वालीं गतिविधियों में होम स्टे को शामिल करने की मांग रखी है। उन्होंने अल्पावधि कृषि गतिविधियों को भी मनरेगा में शामिल करने की पैरोकारी की। कहा, मनरेगा की तर्ज पर शहरी क्षेत्रों में मजदूरों के लिए एक नई योजना लाई जानी चाहिए।

राशन कार्ड बनाने की मिले अनुमति

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में काफी संख्या में प्रवासी आ रहे हैं, जिनके पास कोई राशन कार्ड नहीं है। भारत सरकार ने एक अप्रैल के बाद राशन कार्ड बनाने पर रोक लगा दी है। उन्होंने कहा कि राज्य में लगभग ऐसे तीन लाख लोग हैं, जिनके जीवनयापन का भी कोई तत्काल साधन नहीं है। ऐेसे में राशन कार्ड बनाने की अनुमति दी जाए।

राज्य में लाए गए 45 हजार प्रवासी
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक राज्य में 45 हजार प्रवासियों को वापस लाया जा चुका है। इसका खर्च राज्य सरकार ने वहन किया है। पुणे व सूरत से भी ट्रेन से लोगों को वापस लाया जा रहा है। दो लाख श्रमिकों के खाते में दो हजार रुपये की धनराशि जमा कराई गई है। प्रदेश में श्रमिक कानूनों में सुधार किया गया है।

किसानों के लिए सिंगल विंडो
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुबंध पर खेती करने की दिशा में पहल की गई है। उद्योगों की भांति किसानों के लिए भी सिंगल विंडो सिस्टम के लिए पोर्टल तैयार किया जाएगा। खनन के चुगान में बड़ी संख्या में श्रमिकों की आवश्यकता रहती है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए भी एनजीटी से अनुमति प्रदान करने में प्राथमिकता दिए जाने की उम्मीद जताई है।

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