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Dehradun News: स्थानीय बोली नहीं बन रही उपचार में बाधा, मैत्री डेस्क बनी जरिया

Tue, 05 Sep 2023 01:00 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 05 Sep 2023 01:00 AM IST
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Local dialect is not becoming a hindrance in the
अनुवादक बन कर्मचारी चिकित्सकों को बता रहे मरीजों की समस्या
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पीएचसी कालसी ने मरीजों की सुविधा के लिए की अच्छी पहल



प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कालसी में दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के उपचार में स्थानीय बोली बाधा नहीं बन रही है। अस्पताल प्रशासन ने जौनसारी बोली में मरीजों से बातचीत करने और उनकी मदद के लिए मैत्री हेल्प डेस्क बनाया है। डेस्क के कर्मचारी अनुवादक की भूमिका निभाकर चिकित्सक को मरीज की परेशानी बताते हैं। जांच से लेकर दवा लेने तक मरीजों की पूरी सहायता करते हैं।



कालसी विकासखंड के 111 ग्राम पंचायतों के लोग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पर निर्भर है। यहां रोजाना 150 से 200 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। कई मरीज जौनसारी बोली में ही बात करते हैं। स्थानीय बोली में मरीज की ओर से बताए बीमारी के लक्षण चिकित्सक की समझ में नहीं आते है। वहीं चिकित्सक की ओर से मरीजों को दी गई सलाह भी उनकी समझ से परे होती है।
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पीएसची के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. वसीम कुरैशी ने बताया कि मरीजों को हो रही असुविधा को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने शनिवार से मैत्री हेल्प डेस्क शुरू किया है। हेल्प डेस्क का काउंटर अस्पताल के मुख्य द्वार के पास बनाया गया है। जैसे ही पारंपरिक वेषभूषा पहने और बुजुर्ग मरीज अस्पताल में प्रवेश करते है, हेल्प डेस्क पर तैनात कर्मचारी स्वयं उनके पास जाते हैं।
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पहले डाक्टर से बातचीत में समस्या होती थी। आज अस्पताल में आते ही कर्मचारी पास आए और मदद करने की बात कही। कर्मचारियों ने डॉक्टर को परेशानी बताई, दवा दिलवाने में भी मदद की। डॉक्टर और कर्मचारी बहुत अच्छे हैं। - विमला देवी, (60) बाढ़वाला गांव





कर्मचारियों ने पर्चा बनवाने में मदद की। कर्मचारी जौनसारी में बात कर रहे हैं। उन्होंने हमारी परेशानी ध्यान से सुनी, चिकित्सकों को बताई। बस कुछ ही देर में जांच हो गई और दवा भी मिल गई। चिकित्सक और कर्मचारी अच्छा काम कर रहे हैं। - डोलो देवी (50), पिपाया गांव





पहले पर्चा बनवाने और चिकित्सक को दिखाने में बहुत समय लगता था। आज कर्मचारियों ने तुरंत पर्चा बनवाया। चिकित्सक को सभी परेशानी बताई। चिकित्सक ने जल्द ठीक होने की बात कही। अगर हर विभाग में अपनी भाषा में बात करने की सुविधा हो जाए तो कितना अच्छा होगा। - सावित्री, (62) सुजाऊ गांव






आज अस्पताल में बड़ा बदलाव देखने को मिला। कर्मचारी हमारी बोली में बात कर रहे थे। उन्होंने पर्चा बनाने, डॉक्टर को दिखाने और दवाई दिलवाने तक में मदद की। आज डाक्टर को दिखाने में कोई परेशानी नहीं हुई है। यह व्यवस्था चलती रहनी चाहिए। - सुन्नो देवी, (65) निछिया गांव





हेल्प डेस्क टीम में छह कर्मचारी

वरिष्ठ परामर्शदाता हरीश पैन्यूली, लैब टेक्नीशियन दिनेश, आशा फैसिलिटेटर शीला चौहान, सुषमा, नीलम और निर्मला।
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