पलायन का असर: इंसानों के छोड़े घरों में बसने लगे गुलदार, वैज्ञानिकों के अध्ययन में हुआ खुलासा
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उत्तराखंड में पलायन की वजह से पहाड़ के जो मकान खाली हो गए, उनमें अब गुलदार आबाद हो रहे हैं। वीरान गांव तेजी से जंगली जानवरों की आबादी के रूप में तैयार हो रहे हैं। पौड़ी, श्रीनगर के कई क्षेत्रों में हुए भारतीय वन्य जीव संस्थान के वैज्ञानिकों के शोध में यह बात सामने आई है।
भारतीय वन्य जीव संस्थान में चल रही 33वीं वार्षिक शोध कार्यशाला में संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.दीपांजन नाहा के बताया कि पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर, एकेश्वर, दमदेवल, कोटद्वार, सतपुली, खिर्सू, पोखड़ा जैसे इलाकों में उन्होंने शोध किया।
इन इलाकों में गांव खाली होने से घास के मैदान उग आए हैं, जो गुलदारों के लिए प्राकृतिक पर्यावास साबित हो रहे हैं। वहीं, ग्रामीणों के पालतू पशु उनके लिए आसान शिकार बन रहे हैं।
जनसंख्या भी तेजी से बढ़ी
इस तरह वीरान गांवों के खाली मकानों में अब गुलदारों की बस्ती आबाद हो रही है। जिससे इनकी जनसंख्या भी तेजी से बढ़ने लगी है। प्रति 100 वर्ग किमी में गुलदारों की संख्या 13 तक पहुंच गई है, जिसे वैज्ञानिक काफी बड़ा आंकड़ा मान रहे हैं।
हमले रोकने को बनी टीम
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉॅ.दीपांजन नाहा ने बताया कि गुलदारों के हमले रोकने को रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया गया है। इसमें वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों के अलावा वन विभाग, पुलिस विभाग के अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं।
वहीं, डॉ.नाहा के मुताबिक पर्वतीय इलाकों में जंगली सूअर व बंदरों द्वारा ग्रामीणों की फसलों को तहस-नहस करने के साथ ही उन पर जानलेवा हमले भी कर रहे हैं, इस पर भी अध्ययन किया जा रहा है।