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LBS अकादमी में आईटीबीपी जवान ने ही की थी साथी दारोगा की हत्या, कोर्ट ने दोषी माना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 24 Mar 2018 08:07 PM IST
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chandra shekhar
- फोटो : amar ujala
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लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (एलबीएसएनएए) मसूरी में वर्ष 2015 में हुए गोलीकांड में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय ने आईटीबीपी के जवान चंद्रशेखर को दोषी ठहराया है। गोलीकांड में एक दारोगा की मौत हो गई थी जबकि बचाव में एक अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हुआ था। चंद्रशेखर को मंगलवार 27 मार्च को सजा सुनाई जाएगी।
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शासकीय अधिवक्ता जेके जोशी ने बताया कि 10 जुलाई 2015 को एलबीएसएनएए गेट के बैरक में आईटीबीपी 34वीं बटालियन के दारोगा सुरेंद्र लाल और सिपाही अख्तर हुसैन कुछ अन्य जवानों के साथ आराम कर रहे थे।
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तभी जवान चंद्रशेखर वहां पहुंचा और उसने एलएमजी से सुरेंद्र लाल पर गोली चला दी। बीच बचाव की कोशिश में अख्तर हुसैन पर भी गोली लगी। गोलीकांड में सुरेंद्र लाल की मौत हो गई। भागते समय चंद्रशेखर ने गेट पर तैनात दरोगा राकेश पर भी गोली चलाई। हालांकि किस्मत अच्छी होने के चलते वह बच गया।
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चंद्रशेखर को धारा 302 और 307 के तहत दोषी ठहराया
चंद्रशेखर कई जिंदा कारतूस और एलएमजी लेकर फरार हो गया था। मसूरी पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की। दो दिन बाद उसने चंडीगढ़ सेक्टर 34 स्थित पुलिस थाने में आत्मसमर्पण कर दिया था। उसके कब्जे से एलएमजी और 70 जिंदा कारतूस भी बरामद हुए थे। मामले में कुल 23 गवाहों का परीक्षण हुआ। शनिवार को एडीजे तृतीय अजय चौधरी ने चंद्रशेखर को धारा 302 और 307 के तहत दोषी ठहराया।
उसे सुरेंद्र लाल की हत्या और अख्तर हुसैन की हत्या के प्रयास का दोषी करार दिया गया है। इस मामले में फैसला 27 मार्च को आएगा। धारा 302 में उसे मृत्युदंड भी दिया जा सकता है। दोषी करार दिए जाने के बाद चंद्रशेखर को जेल भेज दिया गया।