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लता मंगेशकर: पहाड़ों के हुस्न को अपने गीतों से लगा दिए थे चार चांद, सुरों की देवी का था पहला हिट गीत

Mon, 07 Feb 2022 08:25 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal कुमार अतुल, अमर उजाला, देहरादून
कुमार अतुल, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 07 Feb 2022 08:25 PM IST
सार

एक उद्दीपन के रूप में नायिका को पहाड़ी पृष्ठभूमि में पेश करना हमेशा से बॉलीवुड के निर्देशकों का पसंदीदा शगल रहा है।

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lata mangeshkar death: her voice enhance the beauty of mountains
लता मंगेशकर - फोटो : Twitter @IIMMDelhi

विस्तार

लता जी की रूहानी आवाज सिनेमा के रुपहले पर्दे पर पहाड़ के खूबसूरत नजारों में हमेशा चार चांद लगा दिए। चाहे श्वेत-धवल हिम के मुकुट पहने शीश ताने गर्वीले पहाड़ हों, झर-झर बहते झरने हों, कल-कल बहती नदी हो, बांह फैलाते देवदार हों अथवा सिकुड़ता-सहमता चीड़ हो, वी का आकार बनाती गहरी घाटियां हों उनके गीत उनमें खूबसूरती टांक देते थे।

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पहाड़ की खूबसूरती में इजाफा कर दिया
याद करिए फिल्म राम तेरी गंगा मैली का वह गीत जिसमें वह गाती हैं ... हुस्न पहाड़ों का, ओ साहिबा/ हुस्न पहाड़ों का/ क्या कहना की बारों महीने/ यहां मौसम जाड़े का/ क्या कहना की बारों महीने/ यहां मौसम जाड़े का ...लता के गाए गीत से पहाड़ की पूरी जिंदगी साकार हो उठती है। इस गीत ने नायिका के साथ ही पहाड़ की खूबसूरती में इजाफा कर दिया है।
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एक उद्दीपन के रूप में नायिका को पहाड़ी पृष्ठभूमि में पेश करना हमेशा से बॉलीवुड के निर्देशकों का पसंदीदा शगल रहा है। सुखद संयोग ही है जिस गीत ने लता जी को पहचान दी पूरी तरह पहाड़ की पृष्ठभूमि में फिल्माया गया था।-कौन भूल सकता है फिल्म बरसात का लता जी का पहला सुपरहिट सदाबहार गीत हवा में उड़ता जाए मोरा लाल दुपट्टा मलमल का ... हो जी, हो जी।


लता जी की आवाज में  प्रेम पर्बत का वह गीत सुन लीजिए इसकी तो धुन भी पहाड़ी है...ये दिल और उनकी निगाहों के साये....पहाड़ों को चंचल किरन चूमती है....हवा हर नदी का बदन चूमती है। शहद में घुला पहाड़ का पूरा रोमानीपन सुर बनकर झरने की तरह फूट पड़ता है।

चाहे मधुमती का गीत हो आजा रे परदेसी....मैं तो कबसे खड़ी इस पार कि अंखियां थक गईं पंथ निहार में पूरा पहाड़ ही दिखता है। कितनी फिल्मों का नाम लें..जिस देश में गंगा बहती है का वो गीत सुन लीजिए जिसमें पहाड़ का दर्द ओ बसंती पवन पागल ना जा रे ना जा और हिमालय की गोद का सीढ़ीनुमा खेतों के बीच फिल्माया ..एक तू जो मिला में पहाड़ की खूबसूरती गीत से उभर कर सामने आती हैं।



नूरी में कश्मीर और कुदरत में हिमाचल का सौंदर्य लता के गीतों के नेपथ्य में था। इन गीतों में उनकी मीठी आवाज शहद के झरनों की मानिंद वादियों में गूंजती रहती। श्रोताओं पर एक जादू सा छा जाता। वह इन गानों को सुनकर मदहोशी के आलम में चले जाते।  गढ़वाली फिल्म रैबार में भी एक गीत गाकर लता जी ने पहाड़ को आशीष दिया था।

गंगा की महत्ता को भी सुर दिया
लता मंगेशकर ने गंगा पर लिखे गीतों को गाकर भारतीय संस्कृति की सनातन वाहिका को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी। गंगा की सौगंध का वह वह गीत गंगा-जमुनी तहजीब का आज भी परचम लहराता है कि मानों तो मैं गंगा मां हूं, ना मानों तो बहता पानी... जब वह गाती हैं कि कोई वजू करे मेरे जल से कोई मूरत को नहलाए.. तो लगता है कि वह राष्ट्रीय संदेश दे रही हों। इससे पहले भी उन्होंने गंगा मैया में जब तक पानी रहे ...मेरे सजना तेरी जिंदगानी रहे और गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो गाकर गंगा की महत्ता को सुर दिए।   

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