उत्तराखंड: भारी बारिश से तीर्थयात्री फंसे
उत्तरकाशी। बृहस्पतिवार देर रात मूसलाधार बारिश से जगह-जगह भूस्खलन सक्रिय होने के कारण गंगोत्री हाईवे ऋषिकेश एवं गंगोत्री की ओर आधा दर्जन से ज्यादा जगहों पर अवरुद्ध हो गया। शुक्रवार देर शाम तक भी यातायात बहाल नहीं हो पाया है।
बीआरओ के जवान जेसीबी, डोजर आदि से मलबा साफ कर यातायात बहाल करने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन शुक्रवार देर शाम तक भी नालूपाणी, गंगनानी एवं हेलगूगाड में हाईवे अवरुद्ध है। अन्य स्थानों पर भी बारिश के साथ मलबा एवं पत्थर आने से यातायात खासा जोखिम भरा बना हुआ है।
समाचार लिखे जाने तक गंगोत्री से लौट रहे करीब 25 तीर्थयात्री, 150 कांवड़िए तथा योग गुरू रामदेव एवं उनके जत्थे में शामिल करीब 450 अनुयायी गंगनानी में फंसे हुए हैं।
मौके पर मौजूद एसओ मनेरी मनोज नेगी ने बताया कि सड़क खोलने का कार्य चल रहा है। रात तक इन सभी यात्रियों को उत्तरकाशी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
दिनभर बाधित रहा बदरीनाथ हाईवे
गोपेश्वर/जोशीमठ। तीन दिनों से बार-बार बाधित हो रहा बदरीनाथ हाईवे शुक्रवार को लामबगड़, पाताल गंगा, पागलनाला और कंचन गंगा में बंद रहा।
लामबगड़ में हाईवे पर भारी मात्रा में भूस्खलन हो गया है जबकि कंचनगंगा में जलस्तर बढ़ गया है और यहां बडे़-बडे़ बोल्डर हाईवे पर आ गए हैं जिससे आवागमन ठप हो गया है।
सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के मजदूर और जेसीबी लामबगड़ में हाईवे को सुचारु नहीं कर पाए। सीमा सड़क संगठन के कमांडर कर्नल निलेश चंदाराना का कहना है कि लामबगड़ में लगातार भूस्खलन हो रहा है।
बारिश थमने के बाद ही हाईवे को खोला जा सकता है। जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन ने बताया कि बदरीनाथ हाईवे के सुचारु होने के बाद ही धाम और पड़ावों पर रोके गए तीर्थयात्रियों को आवाजाही की अनुमति दी जाएगी।
जगह-जगह पहाड़ी से गिर रहे पत्थर
रुद्रप्रयाग। बदरीनाथ और केदारनाथ हाईवे को मौसम ठीक होने पर बीआरओ और लोनिवि खोल तो रहे हैं, लेकिन यह मार्ग यातायात की दृष्टि से सुरक्षित नहीं ठहराए जा सकते हैं।
कहीं पुश्ते ढह रहे हैं, तो कहीं पहाड़ी गिर रहे पत्थर और मलबे का ढेर सड़क पर जमा हो रहे हैं। सड़कों के ऊपर और नीचे दोनों ओर खतरा ही खतरा है।
पिछले साल की आपदा से केदारनाथ हाईवे की स्थिति बहुत खराब है। एक ओर अलकनंदा नदी सड़क को काट रही है, वहीं ऊपर पहाड़ी से पत्थरों की बरसात हो रही है। ऐसे में यह स्थान इतना खतरनाक हो गया है कि पत्थर गिरने पर वाहनों का पीछे मोड़ना भी संभव नहीं है।
संवेदनशील स्थानों पर नजर रखने के लिए पुलिस तैनात है। सड़क खोलने के लिए मशीनें साइट पर मौजूद हैं।
-डॉ. राघव लंगर, डीएम रुद्रप्रयाग
टिहरी बांध का जलस्तर 771.25 आरएल पहुंचा
नई टिहरी। लगातार हो रही बारिश से बांध का जलस्तर आरएल (रिर्जव वाटर लेवेल) 771.25 पर पहुंच गया है। भागीरथी से 536.92 और भिलंगना नदी से 362.47 क्यूमेक्स पानी का बहाव दर्ज किया गया है।
झील से 200 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। वर्तमान में बांध की चारों टरबाइन चल रही है और आठ मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन हो रहा है।
जेपी ने किया बैराज खाली
गोपेश्वर। भारी बारिश को देखते हुए अलकनंदा पर लामबगड़ में निर्मित विष्णुप्रयाग जलविद्युत परियोजना की कार्यदायी संस्था जेपी कंपनी ने परियोजना के बैराज में रोका पानी नदी में छोड़ दिया है।
कंपनी ने शुक्रवार को दोपहर 12 बजकर 40 मिनट पर बैराज का पहला गेट खोला। इसके बाद धीरे-धीरे सांय तीन बजे तक सभी सात गेट खोलकर बैराज को खाली कर दिया है।