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'पहाड़' सरीखी हुई पहाड़ में चकबंदी
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 06 Mar 2017 11:09 AM IST
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- फोटो : file photo
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पहाड़ की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्वैच्छिक चकबंदी की पहल नाकाम होती दिख रही है।
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लंबे समय से चली आ रही कसरत के बाद प्रदेश के एक फीसदी से भी कम गांव स्वैच्छिक चकबंदी को तैयार हुए हैं। कुल 16462 गांवों से केवल 75 ही चकबंदी को तैयार हुए, जबकि सरकार ने ऐसे गांव को एक करोड़ तक इनाम देने की घोषणा की थी। ऐसे में जहां-तहां बिखरे खेतों को एक कर कृषि उत्पादकता बढ़ाने की योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही है।
पहाड़ में अर्थव्यवस्था पूरी तरह से कृषि पर आधारित है, लेकिन किसान के खेत एक साथ नहीं होने से वहां आधुनिक कृषि तकनीकों का इस्तेमाल नहीं हो सकता। खेती की उत्पादकता बढ़ाने से प्रदेश की आर्थिकी को बल देने के लिए चकबंदी की प्रक्रिया वर्ष 2010-11 से चल रही है।
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वर्ष 2014 में 14 नये विभागों के साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में चकबंदी नाम से अलग विभाग बनाया गया। फरवरी 2016 में चकबंदी अधिनियम बना, लेकिन इस विभाग में अब तक अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं हो पाई है। इसकी नियमावली भी तैयार नहीं है। यह हाल तब है जबकि प्रदेश सरकार की ओर से स्वैच्छिक चकबंदी पर हर गांव को एक करोड़ रुपये इनाम के रूप में दिए जाने की घोषणा की गई थी।
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सरकार की इस घोषणा के बाद हालांकि कुछ गांव इसके लिए आगे आए, लेकिन इन गांवों में चकबंदी नहीं हो सकी है। इस क्षेत्र में काम कर रहे गरीब क्रांति अभियान के संयोजक कपिल डोभाल बताते हैं कि अल्मोड़ा जिले के ताड़ीखेत ब्लॉक का झलौडी, पौड़ी जनपद में कल्जीखाल ब्लॉक का फलदा व दिवई, टिहरी जनपद के थौलधार ब्लॉक का कंडीसौड सहित कई गांव ऐसे हैं जो स्वैच्छिक चकबंदी को तैयार हैं, लेकिन पहाड़ में चकबंदी नहीं हो पाई है।
क्या होगा चकबंदी से
चकबंदी से खेती की उत्पादकता के साथ ही रोजगार के अवसर बढ़ते, असिंचित खेतों को पानी मिलता, बिखरे खेतों के एक या दो चक बनते, जिसमें किसान बागवानी, जड़ी बूटी एवं अन्य फसलों का उत्पादन कर सकते। जानकारों का कहना है कि इससे खेती की उत्पादकता बढ़ती और काफी हद तक पलायन रुकता।
क्यों आगे नहीं आ रहे गांव
ग्रामीणों का कहना है कि चकबंदी शासन की फाइल से बाहर नहीं आ पाई है, कुछ गांवों में चकबंदी के बाद इन्हें मॉडल के रुप में प्रस्तुत किया जाता तो क्षेत्र के लोग इसके प्रति प्रोत्साहित होते, वह समझ पाते कि किस तरह से उत्पादकता बढ़ती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। केवल फाइलों में प्रक्रिया चल रही है। ग्रामीणों में कई तरह की शंकाएं भी हैं।
पर्वतीय गांवों में चकबंदी विभाग में 419 अधिकारियों और कर्मचारियों के पद सृजित किए गए हैं, इन पदों पर नियुक्तियां होनी है। इसके अलावा इसकी नियमावली भी तैयार होनी है, जिसका ड्राफ्ट बन चुका है, नई सरकार के कैबिनेट के प्रस्ताव के बाद ही नियमावली मंजूर हो सकेगी।
- संतोष बड़ोनी, उप सचिव