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लखवाड़ पर पर्यावरण मंत्रालय का ‘ओके’
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 06 Sep 2014 09:07 AM IST
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मामूली संशय के चलते पिछले एक साल से रुकी लखवाड़ जल विद्युत परियोजना के निर्माण का रास्ता अब साफ हो गया है। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने केंद्रीय योजना आयोग को लिखे पत्र में कहा है कि लखवाड़ प्रोजेक्ट के लिए दी गई क्लीयरेंस मानकों के अनुरूप है।
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फैसले की जद में नहीं आता
इससे पहले भी इसी तरह की क्लीयरेंस व्यासी जल विद्युत परियोजना को दी जा चुकी है। मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि यह प्रोजेक्ट सुप्रीम कोर्ट के 13 अगस्त 2013 के फैसले की जद में भी नहीं आता है। इसलिए लखवाड़ प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में कोई कानूनी अड़चन नहीं है। यह जानकारी मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने दी है।
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लखवाड़ हाइड्रो प्रोजेक्ट के मामले में शुक्रवार को मुख्य सचिव सुभाष कुमार नई दिल्ली में वन एवं पर्यावरण सचिव अशोक लवासा से मिले। मुख्य सचिव ने बताया कि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल अलकनंदा और भागीरथी पर बनने वाली 24 परियोजनाओं पर लगाने के निर्देश दिए थे।
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इस बारे में कानूनी राय लेने के बाद ही यह फैसला हुआ है। मुख्य सचिव ने केंद्रीय योजना आयोग के सचिव से मिलकर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय का पत्र सौंपा। आयोग के सचिव ने मुख्य सचिव को भरोसा दिलाया कि अब तसवीर साफ है, इसलिए जल्द ही इन्वेस्टमेंट क्लीयरेंस जारी कर दी जाएगी।
अभी किशाऊ में हैं दिक्कतें
किशाऊ हाइड्रो प्रोजेक्ट को लेकर हिमाचल प्रदेश के तेवर परेशानी में डाल रहे हैं। हिमाचल इस प्रोजेक्ट में उत्पादन से लेकर तमाम तरह के लाभ में 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी चाहता है।
पहले हिमाचल को 25 प्रतिशत हिस्सेदारी देने की बात पर सहमति बनी थी। लेकिन हिमाचल ने उत्तराखंड सरकार को लिखी चिट्ठी में 50 फीसदी हिस्सेदारी का दावा किया है। उत्तराखंड के मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने हिमाचल के रुख से केंद्र को अवगत करा दिया है। केंद्र इसी माह दोनों राज्यों के साथ बैठक करेगा।