'सेक्स पावर' के लिए इस यात्रा में शामिल होते हैं तस्कर
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देश दुनिया में प्रसिद्व उत्तराखंड की मां नंदा देवी राजजात यात्रा में केवल श्रद्धालु ही नहीं, सेक्स पावर खोजने पहुंचे तस्करों के सैकड़ों एजेंट भी शामिल थे।
एजेंटों ने बेदनी बुग्याल में न केवल कीड़ा जड़ी (यारसा गंबू) का सर्वे किया, बल्कि स्थानीय लोगों से करोड़ों रुपयों की डील भी कर डाली। सूत्रों के अनुसार खुफिया एजेंसियों को आस्था पथ पर फैले तस्करों के जाल की जानकारी थी, लेकिन यात्रा शांतिपूर्वक निपटे, इसलिए पुलिस और खुफिया एजेंसी बैकफुट पर रही।
चमोली जिले के वाण गांव से लगभग 14 किमी दूरी स्थित है बेदनी बुग्याल। वाण तक मोटर मार्ग है। इसके बाद कठिन चढ़ाई चढ़कर यात्रा गेरोली पाताल होते हुए बेदनी बुग्याल पहुंचती है। बेदनी बुग्याल 3300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह ऊंचाई कीड़ा जड़ी की पैदावार के लिए माकूल है।
चीन-नेपाल के एजेंट को बेचते हैं कीड़ा जड़ी
इस क्षेत्र के अधिकतर गांवों के लोग कीड़ा जड़ी का चुगान कर चीन या नेपाल से आने वाले एजेंट को बेचते हैं। सूत्रों के अनुसार यहां की कीड़ा जड़ी नौ लाख रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिकती है।
सूत्रों के अनुसार राजजात यात्रा में शामिल एजेंट्स ने कई गांवों के लोगों को एडवांस रकम देकर कीड़ा जड़ी बुक कराई है। वहीं, सर्वे कर यह भी पता लगाने की कोशिश की है कि पिथौरागढ़ के सुनहरे रंग की कीड़ा जड़ी की तुलना में यहां की पैदावार कितनी उम्दा है।
सूत्र बताते हैं कि कड़ी जड़ी से होनी वाली मोटी कमाई से ग्रामीणों का रहन-सहन बदल गया है। एक ग्रामीण ने बताया कि बेदनी बुग्याल में छोटे बच्चों को भी कीड़ा जड़ी खोजने के लिए भेजा जाता है।
इस हिमालयी बूटी को घुटने के बल पर रेंगकर तलाशा जाता है। इस काम को बच्चे आसानी से कर लेते हैं इसलिए उनका इस्तेमाल बहुतायत में किया जाता है।
शांत वादियों में गैंगवार का साया
बेदनी बुग्याल की हरीभरी वादियां किसी भी समय रक्तरंजित हो सकती हैं। वाण गांव के सूत्र बताते हैं कि पातर नचौणिया में वाण और सुतोल गांव के लोगों के बीच नंदा देवी की डोली ले जाने को हुए विवाद के पीछे असल कारण कीड़ा जड़ी के लिए वर्चस्व की लड़ाई ही है।
सूत्रों ने बताया कि सुतोल गांव के लोग बेदनी बुग्याल तक अपना क्षेत्र मानते हैं, जबकि वाण गांव के लोगों का तर्क है कि जूरा गली पास को बार्डर माना जाए। बेदनी बुग्याल वाण गांव से पास पड़ता है।
इस इलाके में कीड़ा जड़ी की तलाश के दौरान अक्सर दोनों गांवों के लोगों का आमना सामना हो जाता है और कई बार विवाद भी। सूत्रों के अनुसार, अगर वक्त रहते शासन प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो अंदरखाने चल रही लड़ाई गैंगवार का रूप ले सकती है।
ऐसे चीन पहुंचती है कीड़ा जड़ी
शक्तिवर्धक दवाओं में प्रयोग होने वाली कीड़ा जड़ी की सबसे ज्यादा मांग नेपाल और चीन में है। इसकी तस्करी के लिए सीमांत इलाके में बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। कीड़ा जड़ी बेचने वाले एक ग्रामीण ने बताया कि एजेंट ज्यादातर नेपाल के होते हैं। वह पोर्टर या मजदूर बनकर आते हैं।
एजेंट ग्रामीणों को एडवांस रकम देकर कीड़ा जड़ी का सौदा करते हैं। सीजन समाप्त होने के बाद एजेंट दोबारा गांव आते हैं और उसे तय सौदे के अनुसार कीड़ा जड़ी दे दी जाती है। कीड़ा जड़ी की कीमत क्वालिटी के अनुसार 9 से 12 लाख रुपए प्रति किलो तक होती है।
एजेंट कीड़ा जड़ी लेकर पिथौरागढ़ के रास्ते नेपाल पहुंचता है। काठमांडू में कीड़ा जड़ी की बड़ी मंडी लगती है। मंडी में सबसे बड़ी खरीदार चीन की कंपनियां होती हैं। यह कंपनियां शक्तिवर्धक दवाएं और स्पोर्ट्स स्टारइड बनाती हैं। एजेंट अपने कमीशन लेने के बाद अमूमन चीन के तिब्बती इलाके में अय्याशी करने जाते हैं।
यह कीड़ा जड़ी
कीड़ा जड़ी का वैज्ञानिक नाम यारसा गंबू है। इसे हिमालयी वियाग्रा या हिमालयी गोल्ड भी कहा जाता है। हिमालयी क्षेत्र में बर्फ पिघलने के बाद मई से जून अंत तक इसे निकाला जाता है। तिब्बत के ताकलाकोट, ल्हासा, टेंचू के साथ ही चीन के बीजिंग समेत तमाम शहरों में क्लब और शोरूम में यारसा गंबू की ब्रिकी होती है।
चीन में यारसागंबू की प्रति जड़ी 150 रुपए में मिलती है। जबकि एक किलो 15 लाख रुपए में बिकती है। नेपाल के अलावा चीन और तिब्बत में यारसागंबू प्रतिबंधित नहीं है। यह आम दुकानों में मिल जाती है। इसका इस्तेमाल शक्तिवर्धक व अन्य दवाओं में होता है। साथ ही लोग इसके रस को बीयर और जूस में मिलाकर पीते हैं।