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अब सस्ते में नहीं छूटेंगे चैंपियन
अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 15 Oct 2013 08:25 AM IST
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खानपुर विधायक और वन विकास निगम के अध्यक्ष प्रणव सिंह के बहाने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान भी सतह पर आ गई है।
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सख्त कार्यवाही की कोशिश
कांग्रेस संगठन के स्तर पर अभी नहीं तो कभी नहीं की तर्ज पर सख्त कार्यवाही की कोशिश की जा रही है। तर्क है कि हर बार की तरह इस बार भी विधायक को सस्ते में छोड़ दिया गया तो अनुशासन समिति के वजूद पर ही सवाल उठ खड़ा होगा।
दूसरी ओर मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा कैंप इस मामले को बातचीत के जरिए सुलझा देने की कोशिश में है। इतना साफ है कि पीडीएफ का साथ मिलने के कारण अनुशासन समिति इस बार रणनीतिक रूप से ज्यादा सशक्त नजर आ रही है।
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पार्टी सूत्रों के मुताबिक प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी से प्रणव सिंह के बहाने एक दौर की बातचीत की जा चुकी है। प्रणव सिंह ने नोटिस न मिलने की बात की तो तुरंत ही प्रणव के पीआरओ से नोटिस रिसीव करा लिया गया।
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अंबिका सोनी को सौंपी जा सकती रिपोर्ट
पर अनुशासन समिति इतने पर ही रुकने वाली नही है। दो दिन में प्रणव की ओर से जवाब नहीं मिलता है तो मामले की पूरी रिपोर्ट प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी को सौंपी जा सकती है। इस रिपोर्ट को खुद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य दिल्ली पहुंचा सकते हैं।
संगठन इस बार प्रणव को सस्ते में छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक हर बार यही होता रहा है और ऐसे में अनुशासन समिति के वजूद पर ही सवाल उठ खड़ा हो रहा है। लिहाजा इस बार कोशिश यही है कि प्रणव के खिलाफ कार्यवाही हो।
हालांकि यह अभी साफ नहीं है कि समिति के स्तर से प्रणव के खिलाफ किस तरह की कार्यवाही की जाएगी। पीडीएफ भी बहुत हद तक इस मामले में कांग्रेस संगठन का साथ देते हुए दिख रही है।
कुर्सी छीनने के पक्ष में
पेयजल मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी प्रणव की कुर्सी छीनने के पक्ष में हैं। ऐसे में संगठन का काम आसान हो रहा है। वहीं, मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा कैंप इस मामले की फाइन ट्यूनिंग में व्यस्त है। यह पक्ष चाहता है कि सांप भी मर जाए और लाठी भी टूटे।
लिहाजा बातचीत का रास्ता अपनाया जा रहा है। पर संगठन के स्तर पर दो दिन से ज्यादा का इंतजार न करने की शर्त ने इस पक्ष की मुसीबत बढ़ा दी है।
इससे पहले भी किरकिरी हो चुकी है अनुशासन समिति की
अनुशासन समिति की इससे पहले भी दो-तीन मामलों में किरकिरी हो चुकी है। 2012 के चुनाव में बागियों के खिलाफ कार्यवाही करने के मामले में समिति को नोटिस जारी करने केबाद रोल बैक करना पड़ा था।
इसी तरह बयानबाजी को लेकर एक बार सौ से अधिक नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए पर बात में सभी नोटिस वापस लिए गए। कहा गया कि ये सभी मामले केंद्रीय अनुशासन समिति को सौंपे जाएंगे।
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