केदारनाथ आपदा @7: कुछ संवरा, कुछ और संवरना बाकी है बाबा केदार का धाम, पढ़ें ये खास रिपोर्ट...
- प्रधानमंत्री मोदी की सीधी नजर रहने से पुनर्निर्माण में आई तेजी
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विस्तार
16 जून 2013 की भीषण आपदा के जख्म सरकारी राहत और राज्य के लोगों के पुरुषार्थ के दम पर भर रहे हैं। उनकी स्मृतियों से ये जख्म शायद ही कभी मिट पाएंगे। आज भी जब आपदा की तारीख करीब आती है, तो खौफनाक यादों के रूप में त्रासदी के जख्म हरे हो जाते हैं।
ये कब भरेंगे कोई नहीं जानता। मगर समुद्रतल से 3584 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बाबा का धाम नया और अनूठा रूप धारण कर रहा है। केदारनाथ कुछ संवर गया है, कुछ और संवरना बाकी है।
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केदार बाबा के अनन्य भक्त पीएम नरेंद्र मोदी केदारधाम का पुराना स्वरूप लौटाने के साथ उसे दिव्य और भव्य बनाने में व्यक्तिगत दिलचस्पी ले रहे हैं। उनकी केदारनाथ के पुनर्निर्माण कार्यों पर सीधी नजर है। इसका परिणाम ये है कि राज्य सरकार के लिए केदारनाथ पुनर्निर्माण सर्वोच्च प्राथमिकता का प्रोजेक्ट है। अभी कुछ दिन पूर्व ही पीएम मोदी ने राज्य सरकार को केदारनाथ को अगले 100 वर्ष के हिसाब से विकसित करने को कहा है। पिछले सात सालों में केदारनाथ में काफी कुछ बदला है और बहुत कुछ बदलना बाकी है।
कुछ यूं संवरी है बाबा के धाम की तस्वीर
- मंदाकिनी नदी पर आस्था पथ का निर्माण।
- केदारनाथ की सुरक्षा के लिए तीन लेयर वाली दीवार का निर्माण 250 मीटर गोलाई में।
- दो हेलीपैड बनाए हैं। वीआईपी हेली पैड दूसरा मंदिर से आधा किमी पहले एमआई 26 उड़ान।
- सरस्वती व अलकनांद के संगम घाट निर्माण।
- रामबाड़ा से केदारनाथ के लिए नया रास्ता।
- केदारनाथ मंदिर परिसर का विस्तार, बड़ा किया गया।
- संगम से मंदिर मार्ग को करीब 50 फीट चौड़ा किया गया।
- लिनचौली नए पड़ाव के रूप में विकसित किया गया।
- पहले गौरीकुंड केदारनाथ संचालन सोनप्रयाग से होता है।
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जारी है संवारने का काम
- शंकराचार्य की समाधि स्थल का निर्माण।
- एक म्यूजियम का निर्माण होना है।
- तीर्थ पुरोहितों के 43 भवन बनने, पांच यूनिट तैयार हो चुकी है।
- सरस्वती नदी पर घाट और आस्था पथ का निर्माण हो रहा है।
- एक गुफा बनी, तीन प्रस्तावित हैं, दो का कार्य शुरू हो गया।
ये काम अभी बाकी हैं
- गोलाकार चबूतरे से 250 दिव्य दर्शन की सजाया संवारा जाएगा।
- रामबाड़ा से केदारनाथ रोपवे का निर्माण हो सकता है।
- मंदिर समिति के भवनों का निर्माण होना है।
- यात्रा में पुलिस चौकी और वन विभाग की चौकी बननी है।
- ब्रहम वाटिका का निर्माण होना है।
बाबा के धाम में सपनों की उड़ान
- चारों धामों को रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए रेल मंत्रालय पायलट सर्वे पूरा कर चुका है।
- रोपवे व अन्य परिवहन के आधुनिक संसाधन स्थापित करने हैं।
ताकि प्रदेश की आर्थिकी का पुनर्निर्माण हो
पुनर्निर्माण का मुख्य ध्येय दरअसल प्रदेश की आर्थिकी को मजबूती देना भी है। 2013 में जब आपदा आई तो पर्यटन राज्य उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो गई। भय के वातावरण में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पुनर्निर्माण कार्य कराने के साथ साथ यात्रा शुरू कराने का साहस किया। अलग अलग प्रोत्साहन योजनाओं की संजीवनी से आपदा की मुर्छा को तोड़ने की कोशिशें हुईं।
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सत्ता की कमान संभालने के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने केदारनाथ के पुनर्निर्माण कार्यों पर फोकस किया। मोदी ने चारधाम को लेकर सपनों को उड़ान दी। चारधाम आलवेदर रोड परियोजना और ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना का कार्य तेजी से आगे बढ़ा। जानकार भी मानते हैं कि इन दोनों प्रोजेक्टों के पूरा होने से पहाड़ की आर्थिकी में नया बदलाव आने की संभावनाएं हैं। लेकिन सिस्टम की कमजोरियों, पर्यावरण एवं वन कानून की अड़चनों और अन्य कारणों से दोनों परियोजनाएं समय पर शायद ही पूरी हो पाएंगी।
आपदा की कहानी आंकड़ों की जुबानी
- 4.200 से ज्यादा गांवों का संपर्क पूरी तरह से टूट गया।
- 991 स्थानीय लोग अलग अलग जगहों पर मारे गए।
- 11,000 से अधिक मवेशी बह गए या मलबे में दब गए।
- 1,309 हेक्टेयर भूमि बाढ़ में बह गई।
- 2,141 भवनों का नामों-निशान मिट गया।
- 100 से ज्यादा बड़े व छोटे होटल ध्वस्त हो गए।
- 90 हजार यात्रियों को यात्रा मार्गों से सेना ने निकाला।
- 30 हजार स्थानीय लोगों को पुलिस ने सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
- 09 राष्ट्रीय व 35 स्टेट हाईवे क्षतिग्रस्त हो गए।
- 2385 सड़कों को भारी नुकसान पहुंचा।
- 86 मोटर पुल और 172 बड़े व छोटे पुल बह गए।
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पुनर्निर्माण: सुस्त रफ्तार, कैग ने उठाए सवाल
सात साल बाद भी केदारनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्य पूरे नहीं हो पाए हैं। पूर्व सरकार में हुए पुनर्निर्माण कार्यों पर तो कैग ने कई सवाल उठाए थे। कैग रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र की यूपीए दो सरकार ने केदारनाथ में पुनर्निर्माण से जुड़े मध्यकालिक और दीर्घकालिक परियोजनाओं के लिए 6259.84 करोड़ का अनुमोदन किया। लेकिन मंजूर किए 4617.27 करोड़ रुपये में से 3708.27 करोड़ रुपये से पुनर्निर्माण कार्य हुए।
विश्व बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक वित्त पोषित उत्तराखंड डिजास्टर रिकवरी प्रोजेक्ट के तहत 2700 करोड़ रुपये के प्रस्ताव स्वीकृत हुए। इनमें से 2,300 करोड़ रुपये की राशि से सड़कों, पुलों, पहाड़ियों के ट्रीटमेंट, बेघर लोगों के आवासों का निर्माण पर खर्च हुई। प्रोजेक्ट के तहत 2,382 भवनों का निर्माण किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक मजबूत प्रोजेक्ट के अभाव में प्रदेश सरकार पुनर्निर्माण पैकेज पूरा उपयोग नहीं कर सकी। रिपोर्ट के मुताबिक आपदा प्रभावित जिलों में पांच हेलीड्रोम, 19 हेलीपोर्ट्स, 34 हेलीपैड और 37 बहुउद्देश्यीय हॉल बनाए जाने थे, लेकिन सिर्फ 27 हेलीपैड का निर्माण हुआ। बहुउद्देश्यीय हॉल बने ही नहीं। पुनर्निर्माण पैकेज से बनी 61 फीसदी सड़कों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए।