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दहशतगर्तों ने कश्मीरी पंडितों पर की जुल्म की इंतिहा, पढ़ें रौंगटे खड़े कर देने वाले किस्से

Sun, 26 Jan 2020 12:04 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 26 Jan 2020 12:04 PM IST
सार

  • जान बचाने के लिए रातों-रात कश्मीर छोड़ने को मजबूर हुए हजारों लोग

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kashmiri pandit tell the real story of pain and fear
आतंकी (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

कश्मीरी पंडितों पर जुल्म की कई कहानियां आए दिन हमारे सामने आती रही हैं। लेकिन अमर उजाला संवाद में उन्होंने जो अनुभव साझा किए, उससे सबके रौंगटे खड़े हो गए।

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उन्होंने बताया कि दहशतगर्तों ने कश्मीरी पंडितों पर जुल्म की इंतिहा कर दी। जान बचाने के लिए रातों-रात हजारों लोग कश्मीर छोड़ने को मजबूर हो गए। बसा-बसाया घर, हंसता खेलता परिवार, कारोबार, संपत्ति सब कुछ छोड़कर जा रहे लोग सोचते रहे कि बस किसी तरह जिंदा बच जाएं...
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बाप-बेटे की आंखें निकालकर मार दिया

बीके कौल ने बताया कि दहशतगर्त हिन्दुओं को डराने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे। इसके लिए वह किसी की जान लेने से भी नहीं घबराते। एक बार एक बाप-बेटे ने उनका विरोध किया तो दोनों को सड़क पर गोली मार दी गई। उससे पहले उनकी आंखें निकालकर घोर यातनाएं दी गई। उस घटना के बाद हिन्दुओं में खौफ बढ़ गया। 
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बेटियों के साथ जो हुआ कह नहीं सकते

संजय रैना ने बताया कि बेटियों के साथ इतनी बर्बरता हुई, जिसे सोचकर उनकी रूह कांप उठती है। हिंदुओं की बेटियां सुरक्षित नहीं थी। लोग अपनी बेटियों को घर से बाहर तक नहीं निकलने देते। बड़ी संख्या में लोग अपनी बेटियों की हिफाजत के लिए घर-बार छोड़कर दूसरी जगह चले गए। 

मिलो, भागो या मरो

अशोक कौल ने बताया कि दहशतगर्द हिन्दुओं के घरों के बाहर पोस्टर चिपका देते थे। उस पर तीन विकल्प दिए होते थे। हमारे साथ मिल जाओ। यहां से भाग जाओ या फिर मरने तो तैयार रहो। जिन लोगों के घर के बाहर ये पोस्टर लगते वो रातों-रात वहां से भाग जाते। जो लोग वहीं रहे, उन्होंने या तो इस्लाम अपना लिया या फिर वो मारे गए। 

दिनदहाड़े सड़क पर मारी गोली


पीएन भट ने बताया कि दहशतगर्दों ने उनके गांव के प्रधान को दिनदहाड़े सड़क पर गोली मार दी। लोगों को डराने के लिए दहशतगर्दों ने अधमरे प्रधान के मुंह पर पेशाब किया। हथियारबंद दहशतगर्दों के सामने किसी की बोलने की हिम्मत तक नहीं होती। अपने खिलाफ बोलने वालों की दहशतगर्त हिट लिस्ट बनाते थे। जिन्हें या तो मार दिया गया या वहां से भगा दिया गया। 

मंदिरों में लगा दी आग


दहशतगर्दों ने बड़े पैमाने पर धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाया और हिन्दुओं के मंदिरों में आग लगा दी। स्थानीय युवा उनसे बचने के लिए पास की एक सड़क की तरफ चले गए। किस्मत से तभी सेना की कारवां वहां से गुजरा। इसके बाद ही उन लोगों की जान बच पाई। 

पनून कश्मीर है असली समाधान

कश्मीरी पंडितों ने कहा कि पनून कश्मीर (अपना कश्मीर) ही उनकी समस्या का असली समाधान है। कश्मीर में पंडितों का अलग शहर बसाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंडितों की जमीनों पर मुस्लिमों ने कब्जे कर लिए। वहां रोजगार के साधन, सुविधाएं, सुरक्षा नहीं है। ऐसे में कोई भी पंडित अपनी जान जोखिम में डालकर लौटने का जोखिम क्यों लेगा। सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए सरकार पनून कश्मीर बसाए, जहां उन्हें बसाया जाए।

चिनार और नसगिस दिलाते हैं घर की याद


अधिवक्ता सुरेश कुमार धर ने बताया कि कश्मीर से दूर होने के बाद यहां की यादें उनके जेहन में ताजा हैं। उन्होंने अपने घर के आंगन में चिनार और नरगिस के पेड़ लगाए हैं, ताकि उन्हें देखकर पुराने दिन याद आते रहें। कश्मीर और कश्मीरियत से जुड़ी यादों को सहेजने का वह कोई मौका जाने नहीं देते।

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