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कर्णप्रयाग: स्वीकृति के 12 साल बाद भी नहीं बनी योजनाएं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कर्णप्रयाग
Updated Thu, 05 Apr 2018 03:21 PM IST
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जल विद्युत परियोजना
- फोटो : डेमो फोटो
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ब्लाक के बणगांव और तेफना गांवों के लिए 12 साल पूर्व स्वीकृत योजनाएं आज नहीं बन पाई हैं। पहले योजनाएं विवादों में घिरी रहीं और अब योजनाओं के लिए बजट नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि एक दशक पूर्व बनने वाले योजनाओं की लागत आज दोगुनी हो गई है।
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ब्लाक के बणगांव के लिए वर्ष 2006-07 में पेयजल योजना की स्वीकृति मिली थी। तब पेयजल स्रोत से गांव के टैंक तक करीब 8 किमी लंबी पेयजल लाइन बनाने के लिए 36.41 लाख की स्वीकृति मिली थी। पेयजल निगम को मिली योजनाओं पर विभाग ने काम शुरू कर दिया था, लेकिन यहां पाइपों के चोरी हो जाने से मामला लटक गया। दो साल पहले यहां विभाग की ओर से चार किमी लंबी लाइन बनाई गई, लेकिन पैसा खत्म हो जाने से मामला फिर लटक गया।
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वहीं तेफना पेयजल योजना को वर्ष 2004-05 में 33.17 लाख की स्वीकृति मिली थी। एक साल पूर्व योजना को वन अधिनियम से स्वीकृति मिली तो पेयजल योजना की लागत 33.17 लाख से बढ़कर 49.53 लाख हो गई। ऐसे में दोनों योजनाएं बजट का इंतजार कर रही हैं, जबकि दोनों गांवों की 1500 से अधिक आबादी पेयजल संकट से जूझ रही है।
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तेफना के वीरेंद्र सिंह रावत सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद पेयजल योजनाओं पर काम नहीं होने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इधर पेयजल निगम के सहायक अभियंता पंकज कुमार का कहना है कि दोनों योजनाएं पूर्व में पेयजल निगम गोपेश्वर के पास थीं। कर्णप्रयाग में नया डिवीजन खुलने के बाद योजनाएं कर्णप्रयाग हस्तांतरित हुई हैं। बणगांव के लिए 64.31 लाख और तेफना के लिए 49.53 लाख के इस्टीमेट शासन को भेजे गए हैं। स्वीकृति मिलने के बाद ही काम हो पाएंगे।