तो क्या लोकसभा चुनाव के बाद होंगे पंचायत चुनाव
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लोकसभा के बाद ही उत्तराखंड में पंचायत चुनाव के आसार बन रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद पंचायती राज विभाग की शनिवार को हुई बैठक में इस मुद्दे पर मंथन हुआ।
इस मामले में सरकार भी पक्षकार है और चार सप्ताह में उसे अपना जवाब दाखिल करना है। फिलहाल चुनाव की तारीख आगे बढ़ाने की मंशा से ही सरकार अदालत में अपना पक्ष रखने की तैयारी में है।
तारीखों को लेकर शुरू से ही हीलाहवाली
सरकार शुरू से ही पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर हीलाहवाली कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत और जवाब के लिए एक महीने का समय मिल जाने के बाद शनिवार को अधिसूचना जारी नहीं की गई।
शनिवार को पंचायती राज विभाग की बैठक में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की समीक्षा की गई। सचिव विनोद फोनिया ने बताया कि अभी फैसले की लिखित प्रति प्राप्त नहीं हुई।
लेकिन सरकारी वकील से हुई बातचीत के बाद चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं की जा रही है। उनका कहना है कि फैसले की प्रति आने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग के साथ बैठकर ही चुनाव पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
ये तर्क होंगे सरकार के
सूत्रों के मुताबिक चार सप्ताह बाद सरकार जो जवाब सुप्रीम कोर्ट में पेश करेगी उसमें आपदा कार्यों के चलते इतनी जल्दी परिसीमन में दिक्कत और लोकसभा चुनाव का हवाला दिया जाएगा।
सरकार कोर्ट में यह भी स्पष्ट करेगी कि लोकसभा के साथ पंचायत चुनाव संभव नहीं है। ऐसे में उसके बाद ही पंचायत चुनाव की तारीख तय की जा सकती हैं।