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आपदाः पुनर्निर्माण में जुटी, राहत को भूल गई सरकार

Wed, 11 Dec 2013 10:06 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 11 Dec 2013 10:06 AM IST
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involved in reconstruction, relief forgotten

पुनर्निर्माण के काम में जुटने का दावा कर रही उत्तराखंड सरकार राहत कार्य को भूल चुकी है।

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हाल यह है कि राहत के लिए जिलाधिकारियों से समन्वय के लिए जिला स्तर पर गठित की गई हाई प्रोफाइल समितियां अभी तक काम ही शुरू नहीं कर पाई हैं। समितियों के सदस्य ही सरकार से राहत के काम में तेजी न आ पाने की शिकायत कर रहे हैं।
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आदेश करने की बात भूल गई सरकार
सरकार भी लगता है कि यह आदेश करने की बात भूल गई है। 17 अगस्त को जारी शासनादेश में कहा गया था कि जिला स्तर पर गठित समिति के सदस्य प्रभारी मंत्री, स्थानीय सांसद, स्थानीय विधायक, सामाजिक कार्यकर्ता होंगे।
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राहत से संबंधित किसी भी विवाद का अंतिम निपटारा यह समिति करेगी। इस बीच प्री फैब्रीकेटेड मकान, राहत सामग्री, संपर्क मार्ग आदि को लेकर सरकार को कई विवादों का सामना करना पड़ा। हर बार यह मामला शासन और सरकार के बीच ही उलझ कर रह गया।

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इस बीच में न तो समिति के सदस्यों ने यह सवाल उठाया कि समितियों की बैठक क्यों नही हो रही है और न ही सरकार ने इस बात पर ध्यान दिया कि इन समितियों के जरिए विवादों का निस्तारण किया जाए।

इससे न तो राहत कार्य चल सके और न मुआवजा पूरी तरह बंट पाया। इसी तरह पुनर्वास का मसला भी अभी तक छुआ नहीं जा सका है। रुद्रप्रयाग के प्रभारी मंत्री सुरेंद्र राकेश ने भी आपदा प्रभावित क्षेत्रों में समय नहीं दिया, जिससे यह समितियां पूरी तरह से निष्क्रिय बनी हुई हैं।

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समितियों को गठित करने का आदेश हुआ था पर यह अभी साफ नहीं है कि समितियां गठित भी हुई या नहीं। ऐसे में राहत कार्य में पारदर्शिता को लेकर भी लोगों के बीच में शंका होती है। जब एक फैसला हुआ था तो उस पर अमल होना चाहिए था।
- गोविंद सिंह कुंजवाल, विधानसभा अध्यक्ष

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