{"_id":"59e1970a4f1c1bd1538b75bf","slug":"investigation-officer-shocked-from-teacher-recruitment-scam","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहली बार देखा ऐसा विभाग, जिसका कोई रिकार्ड नहीं : चौबे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहली बार देखा ऐसा विभाग, जिसका कोई रिकार्ड नहीं : चौबे
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 14 Oct 2017 10:20 AM IST
विज्ञापन
shweta chaubey
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एसआईटी प्रभारी और सीबीसीआईडी की अपर पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे के नेतृत्व वाली टीम ने अमान्य प्रमाण-पत्रों से शिक्षकों की नियुक्तियों में फर्जीवाड़े का खुलासा कर शिक्षा विभाग में धांधली की पोल खोलकर रख दी है।
विज्ञापन
हालांकि, यह काम इतना आसान नहीं था, क्योंकि अमान्य डिग्री से सरकारी नौकरी हथियाने वालों को वर्षों से सफेदपोशों का संरक्षण प्राप्त था। शिकायतें तो होती रहीं, मगर उनका बाल भी बांका नहीं हो सका। विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते शिकायत करने वालों को कोई राह नहीं सूझ रही थी। ऐसी स्थिति में फर्जीवाड़े की जांच के लिए एसआईटी गठित हुई तो शिकायतों की फेहरिश्त लंबी होती चली गई। लेकिन एसआईटी की टीम ने पूरी निष्ठा और संजीदगी के साथ अपने काम को अंजाम दिया, जिसके सुखद नतीजे भी सामने आने लगे हैं।
विज्ञापन
वर्ष 2005 की पीपीएस अधिकारी और पीपीएस एसोसिएशन की अध्यक्ष श्वेता चौबे से फर्जी प्रमाण-पत्रों के आधार पर नियुक्ति पाने के मामलों की विवेचना में सामने आई दिक्कतों और नतीजों पर अमर उजाला संवाददाता ने लंबी बातचीत की। आप भी पढ़िए इसके कुछ महत्वपूर्ण अंश...
विज्ञापन
अमान्य प्रमाण-पत्रों पर शिक्षकों की नियुक्तियों की जांच में किस तरह की दिक्कतें आईं?
शिक्षकों के प्रमाण-पत्र पाने के लिए डेढ़ माह तक बेसिक शिक्षा विभाग से लड़ना पड़ा। विभागीय अधिकारियों का रवैया बेहद असहयोग भरा रहा। शुरुआत में तो एसआईटी को बेहद हल्के में लिया गया है। लेकिन जब शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव ने मामले में हस्तक्षेप किया तो तब जाकर अधिकारियों ने रुचि दिखाई और शिक्षकों के प्रमाण-पत्र मिलने का सिलसिला शुरू हुआ।
शिक्षकों के सामने विभागीय अधिकारियों के बेबस होने का क्या कारण मानती हैं?
मैं तो खुद हैरत में हूं, पहली बार ऐसा विभाग देखा है, जिसके पास अपने कर्मचारियों की सर्विस बुक या कोई रिकार्ड तक नहीं है। न तो निदेशालय, न जिला और न ही ब्लॉक स्तर पर किसी तरह का रिकार्ड उपलब्ध है। अमूमन हर विभाग के पास अपने कर्मचारी की सर्विस बुक के साथ ही पूरा रिकार्ड होता है। यही वजह है कि विभागीय अधिकारियों को प्रमाण-पत्र पाने के लिए शिक्षकों को नोटिस पर नोटिस देने पड़े।
विवेचना के दौरान शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों में किस तरह का फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है?
प्रमाण-पत्रों की जांच में गजब का खेल सामने आ रहा है। ऐसा लगता है कि विभाग में उन्हें देखने वाला कोई नहीं है। अब तक की कई जांच में आया है कि शिक्षकों को इंटर पास करने में 15 से 20 साल का वक्त लग गया। कई शिक्षक जिस साल फेल हुए, उसी साल की अंकतालिका देकर नियुक्ति पा गए। एक किस्सा तो अजीब ही है, जिसमें शिक्षा मित्र ने स्नातक पहले किया और इंटर बाद में।
एसआईटी प्रमुख होने के नाते आप शिक्षा विभाग में इस फर्जीवाडे़ के लिए किसे जिम्मेदार मानती हैं?
शिक्षा विभाग मेंऐसी गोलमाल की उम्मीद नहीं की जा सकती, शिक्षक बनने के लिए ऐसी धांधली हैरतअंगेज है। केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि पूरा सिस्टम इसके लिए जिम्मेदार है। नियुक्तियों का अनुमोदन करने वाले भी कम दोषी नहीं हैं, जिन्होंने अपने दायित्व का सही निर्वाह नहीं किया है।
क्या जांच का दायरा बढ़ रहा है। बेसिक के साथ माध्यमिक शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की भी जांच होगी?
एसआईटी के पास माध्यमिक शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों को लेकर भी शिकायतें आई हैं। शिक्षा मंत्री ने भी माध्यमिक शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की जांच का जल्द आदेश मिलने की बात कही थी, पर शासन से एसआईटी को अभी तक किसी तरह का लिखित आदेश नहीं मिला है।
क्या आपके द्वारा विवेचना के लिए अतिरिक्त फंड की मांग की गई?
सीबीसीआईडी अपने सीमित संसाधनों के साथ काम करती है। शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों का रिकार्ड रखना बड़ी चुनौती है। इसके अलावा देश भर के शैक्षणिक प्रतिष्ठानों से जांच कराने में स्टेशनरी आदि का प्रयोग हो रहा है। इसके लिए शिक्षा मंत्री से अतिरिक्त धन की मांग की गई थी। उन्होंने अंतरिम बजट में राशि उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है।
प्रमाण-पत्रों की जांच में टीम ने झोंकी ताकत
प्रदेशभर के शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की जांच के लिए सीबीसीआईडी की लंबी-चौड़ी टीम लगाई है। गढ़वाल रेंज में इंस्पेक्टर राकेश रावत को देहरादून, मणिभूषण श्रीवास्तव को हरिद्वार, भगवान सिंह बिष्ट को चमोली और रुद्रप्रयाग, सुरेंद्र सिंह भंडारी को टिहरी और उत्तरकाशी की जिम्मेदारी दी गई है। कुमाऊं रेंज में दलविंदर सिंह बाजवा को नैनीताल, चंदन सिंह बिष्ट को अल्मोड़ा और बागेश्वर, पावन स्वरूप को पिथौरागढ़ और चंपावत, प्रतिभा भट्ट को ऊधमसिंह नगर जिले की कमान सौंपी गई है। इसके अलावा उप निरीक्षक संजय चोपड़ा जांच से जुड़ी हर पत्रावली का रिकार्ड संभाल रहे हैं।