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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   International Women's Day: Bhavna Sharma is lighting up the lives of women by staying in darkness herself

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: खुद अंधकार में रहकर महिलाओं के जीवन में भर रहीं उजाला भावना शर्मा

Tue, 08 Mar 2022 06:55 PM IST
रेनू सकलानी कैलाश पाठक,संवाद न्यूज एजेंसी,हल्द्वानी
कैलाश पाठक,संवाद न्यूज एजेंसी,हल्द्वानी Published by: रेनू सकलानी Updated Tue, 08 Mar 2022 06:55 PM IST
सार

नेत्र दिव्यांग भावना शर्मा नशा उन्मूलन के लिए अल्मोड़ा, चमोली, भिकियासैंण, देवाल, बागेश्वर में आंदोलनों में भागीदारी कर चुकी हैं। उन्होंने 21 निर्धन बच्चों को गोद लिया है।

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International Women's Day: Bhavna Sharma is lighting up the lives of women by staying in darkness herself
भावना शर्मा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

समाजसेवा और महिला उत्थान का ऐसा जज्बा कि खुद का जीवन अंधेरे में होने के बावजूद महिलाओं के जीवन में उजाला भरने का संकल्प लेकर पिछले 20 वर्षों से महिला उत्थान और समाजसेवा में जुटी हैं बच्चीनगर (कमलुवागांजा) निवासी भावना शर्मा।

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समाजसेवा उनकी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। उनके जज्बे को संबल देने का काम उनके बच्चे कर रहे हैं जो मां के समाजसेवा के कार्यों में साये की तरह उनके साथ खड़े रहते हैं। मूलरूप से रानीखेत निवासी भावना शर्मा में बचपन से ही समाजसेवा और महिला उत्थान का जज्बा रहा है।

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महिलाओं को अधिकार दिलाने के लिए वह संघर्षरत

20 वर्ष पूर्व उनकी आंखों की रोशनी चली गई। कई अस्पतालों में इलाज के बाद भी नेत्र ज्योति नहीं लौटी। इसके बावजूद समाजसेवा और महिलाओं के उत्थान के लिए उनका जुनून कम नहीं हुआ। भावना का कहना है कि महिलाओं को अधिकार दिलाने के लिए वह संघर्षरत हैं।

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इस बार भी उनके बच्चीनगर स्थित आवास पर महिला दिवस पर समारोह का आयोजन किया जा रहा है। जिसका स्लोगन है बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, पहले पढ़ाई फिर विदाई और अधिकारों के लिए सजग होकर लड़ाई लड़ना।


71 वर्षीय भावना नेत्र दिव्यांग होने के बावजूद अल्मोड़ा, भिकियासैंण, चमोली, बागेश्वर, देवाल, स्याल्दे आदि इलाकों में महिलाओं की ओर से चलाए गए नशा विरोधी आंदोलनों में निरंतर भागीदारी करती रही हैं। आगे भी वह इन आंदोलनों में शिरकत करती रहेंगी।


स्वयं को नेत्र विहीन नहीं समझती भावना

भावना का कहना है कि उन्हें अपनी बहुओं और बेटों का इतना अधिक सहयोग मिलता है कि वह स्वयं को नेत्र विहीन नहीं समझती हैं। किसी भी आयोजन में शिरकत करने के लिए साथी महिलाएं और बहुएं उनकी सारथी बनकर साये की तरह उनके साथ रहती हैं।

 
रानीखेत में निजी विद्यालय संचालित कर रहीं भावना ने 21 निर्धन बच्चों को गोद भी लिया है। उनकी शिक्षा, चिकित्सा का पूरा खर्च वह वहन करती हैं। उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं। दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है। एक बेटी मीना तिवारी यूएसए में वैज्ञानिक है। पोते का इसी वर्ष हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के लिए चयन हुआ है।

 

पोती लरिसा पांडे एपल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। यहां बेटे त्रिभुवन शर्मा का परिवार उनकी देखरेख कर रहा है। बहू गरिमा शर्मा उनके कार्यों में मदद करती हैं। रानीखेत में एक बेटा कारोबार कर रहा है। भावना शर्मा बताती हैं कि बेटे और बहुओं की बदौलत उन्हें आज तक एहसास नहीं हुआ कि वह नेत्र दिव्यांग हैं। 

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