महिला दिवस 2021: लहरों पर सवार नैना रच रहीं इतिहास, पढ़ें ऐसी ही होनहार बेटियों की कहानी
आज के दौर की महिला किसी से कम नहीं। चाहे वह भारत की हो या किसी और देश की महिलाएं अपना स्थान राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाती जा रही हैं। जब उत्तराखंड के कुमाऊं की बात की जाए तो अपने पहाड़ से भी कई ऐसी महिलाएं हैं जो कला, विद्या, विज्ञान और खेल जैसे अन्य क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ रही हैं। चलिए पढ़ते हैं कुछ ऐसी ही बेटियों की कहानी...
नित नए आयाम गढ़ रहीं नैना
नदियों की लहरों पर अपनी कयाक पर सवार नैनीताल की नैना नित नए आयाम गढ़ रहीं हैं। महज 13 साल की उम्र में नैना ने ऋषिकेश में अपने चाचा से कयाकिंग सीखनी शुरू की। कयाकिंग में अब तक नैना कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक हासिल कर चुकी हैं। नैना का कहना है कि शुरुआत में पढ़ाई की वजह से परिवार वाले भी कयाकिंग करने पर टोकते थे। पर पिता ने पूरा सहयोग किया। नतीजा सबके सामने है, 2021 में नैना को गंगा कयाक फेस्टिवल में बेस्ट फीमेल पैडलर अवार्ड, बोटर क्रास में स्वर्ण पदक और ओवरऑल फीमेल चैंपियन अवॉर्ड मिला था। 2018 में नैना ने दिल्ली ओलंपिक गेम्स के कयाक स्प्रिंट में स्वर्ण पदक हासिल किया था और 2019 में लद्दाख में आयोजित वर्ल्ड हाईएस्ट कयाकिंग प्रतियोगिता में रजत पदक जीता था।
जरूरतमंदों की मदद और छात्राओं को सीख देना है आईआरएस गुंजन की खूबी
छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षा के लिए प्रेरित करना और जरूरतमंदों की मदद करने की खूबी भारतीय राजस्व सेवा की अधिकारी गुंजन शर्मा के कद को और ऊंचा करती हैं। गुंजन टनकपुर के एसडीएम हिमांशु कफल्टिया की पत्नी हैं और वर्तमान में नजीबाबाद में आयकर उपायुक्त हैं।
कर चोरी रोकने से लेकर राजस्व संग्रहण में वे अपनी पेशेगत भूमिका शत-प्रतिशत ईमानदारी से निभा रही हैं, साथ ही सामाजिक सरोकारों को भी जिम्मेदारी का हिस्सा मानती हैं। महिला, अनाथ बच्चों की मदद से लेकर परिवार के सदस्यों के जन्म दिवस, पर्वों और खास मौकों पर जरूरतमंदों को रुपये, कपड़े, खाद्यान्न और अन्य जरूरत की सामग्री देना उनकी आदत का हिस्सा है। ड्यूटी के बाद बचे हुए समय में छात्राओं को सफलता के सूत्र बताती हैं।
ट्रेल्स दर्रे को पार कर चुकी हैं डीटीओ लता
लता बिष्ट चंपावत में जिला पर्यटन विकास अधिकारी की जिम्मेदारी निभा रही हैं। उनका परिचय इतना भर नहीं है, उन्हें 1994 में बेहद दुर्गम ट्रेल्स दर्रे को पार करने वाली पहली महिला होने का गौरव भी हासिल है। पर्वतारोहण के कई सफल अभियानों का नेतृत्व कर चुकीं लता को 2001 में भारतीय महिला दल का नेतृत्व करते हुए 6695 मीटर की माउंट गंगोत्री प्रथम पर सफल आरोहण करने पर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज ने सम्मानित किया था। 1999 में मैकमोहन रेखा पर स्थित मुकुट पर्वत पूर्व पर प्रथम आरोहण करने पर रक्षा सचिव ने प्रशस्ति पत्र दिया। पर्वतारोहण के अलावा वॉटर स्पोर्ट्स, विंटर स्पोर्ट्स में अंतरराष्ट्रीय स्तर तक शिरकत करने वाली लता को 2011 में राज राजेश्वरी सम्मान और 2015 में तीलू रौतेली पुरस्कार भी मिल चुका है। इसके अलावा साउथ पोल अंटार्कटिका अभियान 2009 में राष्ट्रमंडल साहसिक अभियान में भी वे हिस्सा ले चुकी हैं।