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Dehradun News: दरोगा भर्ती धांधली में एक महीने में जाएगी शासन को रिपोर्ट
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IIकई दरोगाओं के खिलाफ नहीं मिले साक्ष्य, आठ अक्तूबर 2022 को दर्ज हुआ था मुकदमा
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I20 दरोगा जनवरी 2023 में किए गए थे निलंबित
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Iशासन करेगा निर्णय कौन होगा बहाल
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Iदरोगा भर्ती धांधली में विजिलेंस इसी माह अपनी रिपोर्ट शासन को भेजेगी। इस मामले में 40 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। शासन ही निर्णय लेगा कि निलंबित दरोगाओं के खिलाफ क्या कार्रवाई करनी है। इस मामले में 20 दरोगा करीब एक साल से निलंबित चल रहे हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से कई दरोगा ऐसे हैं जिनके खिलाफ धांधली के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। जबकि, कुछ के खिलाफ पैसे के लेनदेन के सुबूत विजिलेंस को मिल गए हैं।
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Iपिछले साल जब यूकेएसएसएससी की परीक्षाओं में धांधली की जांच शुरू हुई तो एक के बाद एक कई मामले खुले। एसटीएफ ने 60 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया। इसी बीच मामला सामने आया कि 2015 में हुई दरोगा सीधी भर्ती में धांधली हुई है। सूत्रों के अनुसार कुल भर्ती हुए 339 दरोगाओं में से कुछ तो ऐसे हैं जिन्हें अपना मूल काम भी करना नहीं आता है। इस काम के लिए भी वह दूसरों का सहारा लेते हैं। ऐसे में इस मामले की जांच विजिलेंस को सौंपी गई। विजिलेंस ने गत वर्ष आठ अक्तूबर हाकम सिंह समेत कई नकल माफिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। यह परीक्षा पंतनगर विवि की ओर से कराई गई थी। ऐसे में वहां के भी कुछ अधिकारियों के नाम इस मुकदमे में शामिल किए गए।
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Iजांच के दौरान पुलिस मुख्यालय ने 20 संदिग्ध दरोगाओं को निलंबित कर दिया था। शक था कि इन लोगों ने पैसे देकर नौकरी हासिल की है। ऐसे में उनके और उनके रिश्तेदारों के खातों की जांच हुई। इस बीच पता चला कि कुछ लोगों ने अपनी जमीनें गिरवी रखकर नौकरी के सौदागरों को पैसे दिए हैं। इनमें से कुछेक ने तो अपनी जमीन भी इन माफिया के पास गिरवी रखा है। तब से अब तक 40 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए गए। विजिलेंस की जांच पूरी जो चुकी है।I
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IIकई दरोगाओं के खिलाफ नहीं मिले साक्ष्य, आठ अक्तूबर 2022 को दर्ज हुआ था मुकदमा
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I20 दरोगा जनवरी 2023 में किए गए थे निलंबित
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Iशासन करेगा निर्णय कौन होगा बहाल
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Iदरोगा भर्ती धांधली में विजिलेंस इसी माह अपनी रिपोर्ट शासन को भेजेगी। इस मामले में 40 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। शासन ही निर्णय लेगा कि निलंबित दरोगाओं के खिलाफ क्या कार्रवाई करनी है। इस मामले में 20 दरोगा करीब एक साल से निलंबित चल रहे हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से कई दरोगा ऐसे हैं जिनके खिलाफ धांधली के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। जबकि, कुछ के खिलाफ पैसे के लेनदेन के सुबूत विजिलेंस को मिल गए हैं।
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Iपिछले साल जब यूकेएसएसएससी की परीक्षाओं में धांधली की जांच शुरू हुई तो एक के बाद एक कई मामले खुले। एसटीएफ ने 60 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया। इसी बीच मामला सामने आया कि 2015 में हुई दरोगा सीधी भर्ती में धांधली हुई है। सूत्रों के अनुसार कुल भर्ती हुए 339 दरोगाओं में से कुछ तो ऐसे हैं जिन्हें अपना मूल काम भी करना नहीं आता है। इस काम के लिए भी वह दूसरों का सहारा लेते हैं। ऐसे में इस मामले की जांच विजिलेंस को सौंपी गई। विजिलेंस ने गत वर्ष आठ अक्तूबर हाकम सिंह समेत कई नकल माफिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। यह परीक्षा पंतनगर विवि की ओर से कराई गई थी। ऐसे में वहां के भी कुछ अधिकारियों के नाम इस मुकदमे में शामिल किए गए।
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Iजांच के दौरान पुलिस मुख्यालय ने 20 संदिग्ध दरोगाओं को निलंबित कर दिया था। शक था कि इन लोगों ने पैसे देकर नौकरी हासिल की है। ऐसे में उनके और उनके रिश्तेदारों के खातों की जांच हुई। इस बीच पता चला कि कुछ लोगों ने अपनी जमीनें गिरवी रखकर नौकरी के सौदागरों को पैसे दिए हैं। इनमें से कुछेक ने तो अपनी जमीन भी इन माफिया के पास गिरवी रखा है। तब से अब तक 40 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए गए। विजिलेंस की जांच पूरी जो चुकी है।I
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