'पटना में हुई इस हलचल से नेपाल में आया भूकंप'
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प्रख्यात भूवैज्ञानिक और पद्मभूषण से सम्मानित डॉ. केएस वल्दिया ने बड़ा खुलासा किया है। उनका कह है कि नेपाल में विनाशकारी भूकंप पटना से नेपाल तक जाने वाले फॉल्ट के खिसकने के कारण आया था।
भूकंप से भारतीय प्रायद्वीप छह मीटर तक खिसक गया है। डॉ. वल्दिया यहां दशाईथल में हिमालयन ग्राम विकास समिति की ओर से आयोजित साइंस आउटरीच कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम में बच्चों ने उनसे भूकंप के बारे में कई सवाल किए। डॉ. वल्दिया ने कहा कि ताजा भूकंप का असर हमारे देश के मैदानी इलाकों में इसी कारण हुआ क्योंकि यह फाल्ट पटना से आगे नेपाल तक लिंक करने वाला है।
ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण है जिम्मेदार
डॉ. वल्दिया ने कहा इतनी तीव्रता (लगभग 6.8) वाला भूकंप कम से कम 80 वर्ष के बाद आता है। जब धरती के भीतर प्रेशर बनता है तो वह भूकंप के रूप में ही रिलीज होकर सामने आता है।
मौसम में आए बदलाव पर उन्होंने कहा कि यह कोई असामान्य गतिविधि नहीं है। कभी कभी पश्चिमी विक्षोभ ज्यादा प्रचंड रूप में सामने आता है। उसका असर भी लंबे समय तक रहता है।
पश्चिमी विक्षोभ के ज्यादा प्रचंड होने के पीछे वह ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण को जिम्मेदार मानते हैं। उन्होंने कहा कि मौसम चक्र में इस तरह के बदलाव हर दस, बीस साल में आते ही रहते हैं।
काठमांडू से 1500 भारतीयों को लेकर लौटा रेस्क्यू दल
नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को लेने गई प्रशासन की रेस्क्यू टीम लोगों को लेकर वापस पहुंच गई है। यहां पहुंचने पर एसएसबी ने बॉर्डर पर भारतीय नागरिकों का स्वागत कर उनके भोजन आदि की व्यवस्था भी की थी।
नेपाल में आए भूकंप में फंसे भारतीय लोगों को लेने 27 अप्रैल को प्रशासन की टीम यहां से रोडवेज की 25 बसों के साथ काठमांडू के लिए रवाना हुई थी। गुरुवार को देर शाम बसें सीमा पर पहुंचनी शुरू हो गईं। दल के साथ गए एसडीएम नरेश चंद्र दुर्गापाल ने बताया कि नेपाल स्थित भारतीय दूतावास ने 1500 नागरिकों को भारत भेजने के लिए उनके सुपुर्द किया था।
बताया कि दो बसों द्वारा 150 आंध्र प्रदेश के नागरिकों को गोरखपुर रेलवे स्टेशन भेजा गया है। यूपी, बिहार और उड़ीसा के 1150 नागरिकों को सुनौली बॉर्डर भेजा गया।
उत्तराखंड और सीमा से लगे यूपी के 200 नागरिकों को बनबसा लाया गया है। एसडीएम ने बताया कि इनको घरों तक भेजने की व्यवस्था की गई है। मार्ग में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आई, नेपाल प्रशासन ने भी हरसंभव मदद की।