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Dehradun News: मुहर्रम पर गूंज उठी या हुसैन.. या हुसैन की सदाएं
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Iमैदान-ए-कर्बला का मंजर याद कर सोगवारों ने खुद को किया लहूलुहानI
मुहर्रम पर निकाले जुलूस में या हुसैन या हुसैन की सदाएं आसमान में गूंज उठीं। मैदान-ए-कर्बला का मंजर याद कर सोगवारों ने खुद को लहूलुहान कर लिया। जुलूस के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर जगह-जगह रूट डायवर्ट किया गया।
बुधवार को शिया समुदाय के लोगों ने जुलूस निकाला। इस दौरान कर्बला में हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत को याद किया गया। उनकी याद में सोगवारों ने जंजीरों से खुद को लहूलुहान कर दिया। जुलूस में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोग ईसी रोड स्थित इमामबाड़ा में एकत्र हुए। जहां से जुलूस निकाला गया। इस दौरान सोगवारों ने छुरियों और जंजीरों से खुद को लहूलुहान किया तो असमान में या हुसैन, या हुसैन, या हुसैन की सदाएं गूंज उठीं। पूरा माहौल हजरत इमाम हुसैन और उनके साथ शहादत पाने वालों की याद में गमगीन हो उठा।
सोगवार उनकी याद में जार-जार रो रहे थे। मुहर्रम के दौरान पैगाम दिया गया कि हजरत इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला ने इंसानियत की जो राह दिखाई है वह हक और नेक की राह है। नस्लों को उसी राह पर चलने की जरूरत है। मुहर्रम पर सुरक्षा व्यवस्था के कड़े प्रबंध किए गए थे। जुलूस मार्ग पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। साथ ही मुहर्रम के जुलूस के चलते मार्ग डायवर्ट किया गया था।
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मुहर्रम पर निकाले जुलूस में या हुसैन या हुसैन की सदाएं आसमान में गूंज उठीं। मैदान-ए-कर्बला का मंजर याद कर सोगवारों ने खुद को लहूलुहान कर लिया। जुलूस के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर जगह-जगह रूट डायवर्ट किया गया।
बुधवार को शिया समुदाय के लोगों ने जुलूस निकाला। इस दौरान कर्बला में हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत को याद किया गया। उनकी याद में सोगवारों ने जंजीरों से खुद को लहूलुहान कर दिया। जुलूस में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोग ईसी रोड स्थित इमामबाड़ा में एकत्र हुए। जहां से जुलूस निकाला गया। इस दौरान सोगवारों ने छुरियों और जंजीरों से खुद को लहूलुहान किया तो असमान में या हुसैन, या हुसैन, या हुसैन की सदाएं गूंज उठीं। पूरा माहौल हजरत इमाम हुसैन और उनके साथ शहादत पाने वालों की याद में गमगीन हो उठा।
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सोगवार उनकी याद में जार-जार रो रहे थे। मुहर्रम के दौरान पैगाम दिया गया कि हजरत इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला ने इंसानियत की जो राह दिखाई है वह हक और नेक की राह है। नस्लों को उसी राह पर चलने की जरूरत है। मुहर्रम पर सुरक्षा व्यवस्था के कड़े प्रबंध किए गए थे। जुलूस मार्ग पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। साथ ही मुहर्रम के जुलूस के चलते मार्ग डायवर्ट किया गया था।
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