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Dehradun News: टीईटी नहीं की तो सेवा में बने रहेंगे पर नहीं मिलेेगी पदोन्नति
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- सेवानिवृत्ति के लिए पांच साल से कम सेवा वाले शिक्षकों का मामला
- संसद में केंद्र सरकार के जवाब से भी बढ़ी शिक्षकों की चिंता
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास नहीं की तो शिक्षक सेवा में बने रहेंगे, लेकिन उन्हें पदोन्नति नहीं मिलेगी। पांच साल से कम सेवा वाले शिक्षकों के मामले में यह व्यवस्था दी गई है। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष विनोद थापा ने कहा, शिक्षक इस मामले में केंद्रीय बजट सत्र से उम्मीद लगाए थे, लेकिन छूट न मिलने से उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ की ओर से 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट दिए जाने की मांग की जा रही है। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष के मुताबिक सभी शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता से राज्य में 18 हजार शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की अवधि मात्र पांच साल बची है, उनकी भी पदोन्नति रुकी है। शिक्षक इस मामले में केंद्रीय बजट सत्र से कुछ उम्मीद लगाए थे, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से भी स्पष्ट कर दिया गया है कि टीईटी अनिवार्य योग्यता बनी रहेगी। जिससे छूट की अभी कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा, यदि सरकार ने इस मसले पर जल्द कोई कदम न उठाया तो उत्तराखंड में हजारों शिक्षकों के लिए मुश्किलें खड़ी हो जाएगी।
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- संसद में केंद्र सरकार के जवाब से भी बढ़ी शिक्षकों की चिंता
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास नहीं की तो शिक्षक सेवा में बने रहेंगे, लेकिन उन्हें पदोन्नति नहीं मिलेगी। पांच साल से कम सेवा वाले शिक्षकों के मामले में यह व्यवस्था दी गई है। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष विनोद थापा ने कहा, शिक्षक इस मामले में केंद्रीय बजट सत्र से उम्मीद लगाए थे, लेकिन छूट न मिलने से उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ की ओर से 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट दिए जाने की मांग की जा रही है। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष के मुताबिक सभी शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता से राज्य में 18 हजार शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की अवधि मात्र पांच साल बची है, उनकी भी पदोन्नति रुकी है। शिक्षक इस मामले में केंद्रीय बजट सत्र से कुछ उम्मीद लगाए थे, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से भी स्पष्ट कर दिया गया है कि टीईटी अनिवार्य योग्यता बनी रहेगी। जिससे छूट की अभी कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा, यदि सरकार ने इस मसले पर जल्द कोई कदम न उठाया तो उत्तराखंड में हजारों शिक्षकों के लिए मुश्किलें खड़ी हो जाएगी।
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