भाई के शक ने बहन को दिलाया इंसाफ, शव को क्रब से निकलवाकर हत्यारे जीजा को दिलाई उम्रकैद
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बहन के शव को दफनाने के बाद भी भाई को जब उसकी मौत स्वाभाविक नहीं लगी तो उसने दोबारा जांच कराई। नतीजतन प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने पत्नी के हत्यारे पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है और 20 हजार का अर्थदंड भी लगाया है।
इसके अलावा साक्ष्य छिपाने के आरोप में अभियुक्त को तीन वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई गई है। बता दें कि मृतका के भाई को बहन की सामान्य मौत का शक होने पर उसका शव कब्र से निकलवाकर पोस्टमार्टम और विसरा जांच कराई गई थी, जिससे हत्यारे का सच सामने आ सका।
मोहल्ला कानूनगोयान निवासी नसीम की पुत्री शाहीन का विवाह 12 वर्ष पहले अल्ली खां करबला कॉलोनी निवासी हाशिम उर्फ भूरा से हुआ था। तीन जुलाई 2017 को हाशिम की कार दड़ियाल रोड पर लोहिया पुल के पास कथित रूप से दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना मिली।
परिजन वहां पहुंचें तो कार में सवार हाशिम और पत्नी शाहीन घायल अवस्था में थे। कार में उनका अबोध पुत्र हमजा भी था। परिजनों ने दंपति को अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने शाहीन को मृत घोषित कर दिया।
अफजल की शिकायत पर पुलिस ने एसडीएम से अनुमति लेकर शाहीन का शव कब्र से निकलवाकर पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शाहीन की मौत 36 से 72 घंटे पहले होने की बात सामने आई है, जबकि दुघर्टना 18 घंटे पूर्व की बताई गई थी।
पुलिस ने अफजल की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर आरोपी हाशिम को गिरफ्तार कर लिया था। मृतका की विसरा रिपोर्ट में उसकी मौत जहर के चलते होना सामने आई। अभियोग पत्र दायर होने पर इस वाद का सत्र परीक्षण प्रथम एडीजे न्यायालय में हुआ।
अभियोजन पक्ष की ओर से विवेचना अधिकारी कोतवाल चंचल शर्मा, वादी अफजल अली, जाकिर अली, डॉ. खेमपाल और विद्याता शर्मा आदि को परीक्षित कराया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी अपर शासकीय अधिवक्ता संतोष नकवी ने की।
दोनों पक्षों को सुनने और पत्रावली का अवलोकन करने पर प्रथम एडीजे प्रीतू शर्मा ने आरोपी हाशिम को हत्या का दोषी पाया। अदालत ने हत्या की धारा में आरोपी हाशिम उर्फ भूरा को आजीवन कारावास और 20 हजार जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं साक्ष्य छिपाने की धारा 201 के तहत तीन वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।