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लव मैरिज के बाद पति ने तेजाब डालकर की पत्नी की हत्या, अब मिली उम्रकैद की सजा

Thu, 10 Oct 2019 08:29 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काशीपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काशीपुर Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 10 Oct 2019 08:29 AM IST
सार

  • 2009 में हुआ था दोनों का प्रेम विवाह।
  • 17 अगस्त 2016 को अभियुक्त ने पत्नी पर फेंका था तेजाब।

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Husband Gets life imprisonment for wife murder throwing Acid after love marriage
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

शादी के सात साल बाद भी संतान न होने और अनबन के चलते तेजाब डालकर पत्नी की हत्या करने के मामले में प्रथम एडीजे की अदालत ने दोषी पति को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

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काशीपुर निवासी मीनाक्षी ने वर्ष 2009 में अमरोहा (यूपी) निवासी अनिल ठाकुर से प्रेम विवाह किया था। अनिल महुआखेड़ागंज स्थित एक फैक्ट्री में काम करता था। विवाह के कई वर्ष बाद भी जब कोई संतान नहीं हुई तो दंपति में अनबन होने लगी।
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मीनाक्षी पति से अलग पंजाबी सराय में किराए के मकान में रहने लगी थी। इसके बावजूद पति उसके कमरे में आकर उसके साथ मारपीट करता था। 17 अगस्त 2016 की शाम मीनाक्षी सुल्तानपुर पट्टी स्थित बल्ब बनाने वाली फैक्ट्री से ड्यूटी कर लौट रही थी, तभी  एमपी चौक के पास बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा के सामने अनिल ने उस पर तेजाब से भरा डिब्बा फेंका और फरार हो गया।
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पीड़िता को बचाने के प्रयास में कुंडा के ग्राम बगवाड़ा निवासी देवेंद्र और उसके चाचा कमलजीत भी झुलस गए थे। पीड़िता की तहरीर पर अनिल के खिलाफ धारा 307 और 326ए के तहत केस दर्ज किया गया। पीड़िता को एसटीएच हल्द्वानी रेफर किया गया, जहां 21 नवंबर 2016 को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

अभियुक्त को किस धारा में कितनी सजा

बुधवार को प्रथम एडीजे प्रीतु शर्मा ने तेजाब डालकर पत्नी की हत्या के मामले में अभियुक्त अनिल को धारा 302 में आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने जबकि धारा 326ए में आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

जुर्माने की राशि अदा न करने पर आरोपी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास और भोगना होगा। अदालत ने धारा 326ए के तहत लगाए गए 10 हजार के जुर्माने की राशि का 50-50 फीसदी पीड़िता को बचाने के प्रयास में झुलसे लोगों को देने के आदेश दिए हैं।

अभियोजन पक्ष में पेश किए 14 गवाह
विवेचनाधिकारी एसएसआई लाखन सिंह ने अनिल के खिलाफ न्यायालय में अभियोग पत्र दायर किया। इस मुकदमे का सत्र परीक्षण प्रथम एडीजे न्यायालय में हुआ। अभियोजन पक्ष की ओर से 14 गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों को सुनने और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद अदालत ने अभियुक्त को धारा 302 व 326ए के तहत दोषी करार दिया।

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