अब सरकारी योजना से घर लेने में नहीं होगा फर्जीवाड़ा, 65 हजार परिवारों की हुई जियो टैगिंग
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प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (पीएमएवाईजी) के तहत प्रदेश के 65 हजार परिवारों की जियो टैगिंग कर केंद्रीय ग्राम्य विकास मंत्रालय को रिपोर्ट भेजी गई है। वर्ष 2011 में हुई सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना (एसईसीसी) में ये परिवार छूट गए थे। इस कारण इन्हें योजना का लाभ नहीं मिल सका है।
इसमें हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर व पिथौरागढ़ जिले में सबसे ज्यादा परिवार शामिल हैं। केंद्र सरकार जियो टैगिंग का सत्यापन करने के बाद ही इन परिवारों को योजना में शामिल करने के संबंध में निर्णय लेगी।
केंद्र सरकार ने गरीब परिवारों के पक्के आवास बनाने के लिए वर्ष 2016 में पीएमएवाईजी योजना शुरू की है। अब तक राज्य में इस योजना के तहत करीब आठ हजार परिवारों को स्वीकृत आवासों का कार्य पूरा हो चुका है। जबकि लगभग चार हजार आवासों का निर्माण कार्य चल रहा है।
प्रदेश के हजारों गरीब परिवार ऐसे थे। जिनके पास कच्चे मकान थे। लेकिन एसईसीसी के सर्वे से छूट जाने के कारण वह योजना की पात्रता श्रेणी में नहीं आ रहे हैं। मामले में प्रदेश सरकार की पहल पर केंद्र ने वंचित परिवारों की जियो टैगिंग करने के निर्देश दिए थे।
योजना से राज्य में बने आठ हजार आवास
ग्राम्य विकास विभाग ने सूची से छूटे प्रदेश के 65 हजार परिवारों के वर्तमान मकान और आवास बनाने के लिए चयनित स्थान की जियो टैगिंग कर रिपोर्ट केंद्रीय ग्राम्य विकास मंत्रालय को भेजी दी है। इसमें वर्तमान मकान की अक्षांश व देशांतर लोकेशन दी गई है। इसके आधार पर केंद्र सरकार अब जियो टैगिंग सिस्टम से भौतिक सत्यापन करेगी।
अपर सचिव ग्राम्य विकास विभाग राम बिलास यादव कहना है कि पीएमएवाईजी योजना से वंचित परिवारों की जियो टैगिंग का कार्य पूरा कर लिया गया है। 65 हजार परिवारों का रिकॉर्ड केंद्र को भेजा गया है। केंद्र की अनुमति के बाद ही इन परिवारों को आवास योजना का लाभ मिल सकेगा।
पीएमएवाईजी के तहत राज्य में अब तक 12406 आवास स्वीकृत हुए हैं। जिसमें आठ हजार आवासों का कार्य पूरा हो चुका है। जिसमें पात्र परिवार को अंतिम किश्त का भुगतान किया जा चुका है। योजना के तहत आवास की स्वीकृत मिलने पर पात्र परिवार को पहली किश्त के रूप में 60 हजार रुपये की राशि दी जाती है।
पहले चरण का काम पूरा होने के बाद ही दूसरी किश्त मिलती है। मकान पूरी तरह से तैयार होने के बाद अंतिम किश्त दी जाती है। योजना में कुल एक लाख 30 हजार रुपये की राशि केंद्र की ओर से लाभार्थी परिवार को दी जाती है।
किस जिले में कितने घरों की हुई जियो टैगिंग
जिला जियो टैगिंग परिवारों की संख्या
अल्मोड़ा 1969
बागेश्वर 3837
चमोली 4774
चंपावत 1654
देहरादून 2971
हरिद्वार 14784
नैनीताल 1896
पौड़ी 5110
पिथौरागढ़ 6229
रुद्रप्रयाग 5813
टिहरी 2867
ऊधमसिंह नगर 8886
उत्तरकाशी 4214