बीमारी दूर करने के लिए चल रही थी पूजा, मकान की पाल टूटने से दो लोगों की मौत, 14 घायल
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बागेश्वर की सीमा से लगे ढनौलासेरा में पूजा के दौरान तीन मंजिले मकान की पाल (लकड़ी का फर्श) टूटने से दो बुजुर्गों की मौत हो गई जबकि 14 लोग घायल हो गए। घायलों को कांडा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। पांच घायलों की हालत गंभीर होने पर उन्हें बागेश्वर के जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है।
बृहस्पतिवार को ढनौलासेरा निवासी मदन सिंह पुत्र नारायण सिंह के घर की तीसरी मंजिल पर पूजा चल रही थी। देवडांगरों का अवतरण हो रहा था। सुबह 9: 50 बजे अचानक मकान की पाल टूट गई। भार के कारण निचली मंजिलों की पाल भी टूटती चली गई और पूजा में शामिल सभी लोग मलबे से साथ भूतल में आ गिरे। हादसे की जानकारी होने पर आसपास के लोगों ने मौके पर पहुंच कर घायलों को मलबे से निकाला।
हादसे में ढनौलासेरा निवासी हयात सिंह (78) पुत्र देव सिंह की मौके पर जबकि भूपाल सिंह (70) पुत्र हरक सिंह की अस्पताल में मौत हो गई। मकान स्वामी मदन सिंह (65) पुत्र नारायण सिंह, मोहनी देवी (55) पत्नी केशर सिंह, भागुली देवी (55) पत्नी माधो सिंह, विमला देवी (22) पुत्री खीम सिंह, जानकी देवी (55) पत्नी शेर सिंह, शोभा देवी (24) पत्नी सुंदर सिंह, देवकी देवी (60) पत्नी प्रताप सिंह, आनंद सिंह (56) पुत्र दान सिंह, कमला देवी (56) पत्नी मदन सिंह, राजेंद्र सिंह (62) पुत्र नैन सिंह, कमला देवी (55) पत्नी राजेंद्र सिंह, प्रमोद सिंह (32) पुत्र शेर सिंह, नंदन सिंह (60) पुत्र रतन सिंह और उत्तम सिंह (70) पुत्र विशन सिंह घायल हो गए। सभी ढनौलासेरा के रहने वाले हैं।
मदन सिंह की बीमारी दूर करने के लिए चल रही थी पूजा
घटना की जानकारी मिलने पर कांडा तहसील से अधिकारी और कर्मचारी ढनौलासेरा पहुंचे। घायलों को लोग आधा किमी दूर सड़क तक कंधे और डोलियों में ढोकर लाए। वहां से 108 वाहन के जरिए 8 किमी दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कांडा ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल मदन सिंह, राजेंद्र सिंह, मोहनी देवी, देवकी देवी और भागुली देवी को बागेश्वर के जिला अस्पताल रेफर किया गया है।
कांडा अस्पताल की महिला चिकित्सक डॉ. सम्मी उनेसा, डॉ. भारद्वाज, रोहित, मीरा बोरा की टीम ने सभी घायलों का उपचार किया। कांडा के एसडीएम योगेंद्र सिंह, तहसीलदार मैनपाल सिंह, थानाध्यक्ष गोविंद बल्लभ भट्ट समेत पिथौरागढ़ के जिला प्रशासन ने भी मौका मुआयना कर घायलों की कुशलक्षेम पूछी।
मिली जानकारी के अनुसार गृह स्वामी मदन सिंह (65) लंबे समय से बीमार थे। इलाज के बाद भी जब उनको कोई लाभ नहीं हुआ तो परिवार के लोगों ने पूजा कराने की सोची। घटना के समय घर में पूजा चल रही थी। देव डांगरों का अवतरण हो रहा था। इसी दौरान घर की पाल टूट गई और मदन सिंह के साथ ही अन्य ग्रामीण हादसे का शिकार हो गए। गांव के एक बुजुर्ग की मौत हो गई। ढनौलासेरा पिथौरागढ़ जिले का अंतिम गांव है। इस गांव में स्वास्थ्य सुविधा नाम की कोई चीज नहीं है।
स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में गांव के लोग अक्सर देवडांगरों का सहारा लेते हैं। यही कारण है कि मदन सिंह की बीमारी में भी देवडांगरों का ही सहारा परिजन ले रहे थे। केवल देवडांगरों के भरोसे बीमारी के ठीक होने की कल्पना करना मूर्खता ही कहलाएगा लेकिन सवाल यह भी है कि सरकार कब ढनौलासेरा जैसे सीमांत के गांवों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराएगी। कब इस तरह के हादसे देखने को नहीं मिलेंगे।