फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Holashtak started Auspicious works are stopped eight days of Holashtak start from today Uttarakhand News

Haridwar: मांगलिक कार्यों पर विराम, आज से लग गए आठ दिनों के होलाष्टक, शुरू हो गई फागुनी होली की मस्ती

Fri, 07 Mar 2025 03:01 PM IST
रेनू सकलानी कौशल सिखौला, संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
कौशल सिखौला, संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 07 Mar 2025 03:01 PM IST
सार

पतझड़ के मौसम में अचानक चली ठंडी हवाओं ने आती वसंत ऋतु को कुछ शीतल बना दिया है। होलिका पूजन और दहन इस वर्ष 13 मार्च की रात्रि में होगा। होलिका पूजन दिनभर चलेगा।

विज्ञापन
Holashtak started Auspicious works are stopped eight days of Holashtak start from today Uttarakhand News
holi - फोटो : adobe stock

विस्तार

फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी से आठ दिन चलने वाले होलाष्टक शुक्रवार से प्रारंभ हो गए हैं। इसी दिन से विवाहादि मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा। इसी के साथ फागुनी होली की पारंपरिक मस्ती शुरू हो जाएगी। यद्यपि अब शहरों में ढोलक की थाप पर होली के गीत गाने का प्रचलन समाप्त हो गया है।

विज्ञापन


अलबत्ता निकटवर्ती गांवों में कुछ हद तक पुराने जमाने की मस्तियां अभी कायम हैं। पतझड़ के मौसम में अचानक चली ठंडी हवाओं ने आती वसंत ऋतु को कुछ शीतल बना दिया है। होलिका पूजन और दहन इस वर्ष 13 मार्च की रात्रि में होगा । होलिका पूजन दिनभर चलेगा। गंगा सभा के गंगा पंचांग के अनुसार 13 मार्च को सवेरे 10.41 बजे से रात्रि 11.31 बजे तक भद्रा रहेगी।
विज्ञापन


अतः होलिका दहन भद्रा समाप्त हो जाने के पश्चात किया जाएगा। दुलहन्डी अर्थात फाग का रंगीला त्यौहार 14 मार्च शुक्रवार को मनाया जाएगा। विशेष बात यह है भगवान भास्कर फाग के दिन ही मीन राशि में प्रविष्ठ होंगे। अतएव मीन संक्रांति पर पूर्णिमा स्नान का आयोजन भी किया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रंग गुलाल खेलकर खुशियां मनाई जाती
शास्त्रों के अनुसार होलाष्टक में राहु , केतु , शनि , गुरु , शुक्र मंगल आदि गृह क्रूर हो जाते हैं। साथ ही डाकिनी, शाकिनी, पिशाचिनी आदि अघोर तंत्र शक्तियां जागृत हो जाती हैं। शिशिर से वसंत ऋतु परिवर्तन के चक्र में पतझड़ आते ही उदासीन करने वाले तत्व जागृत होते हैं। इसी कारण मांगलिक कार्य निषिद्ध किए गए हैं। उदासी तोड़ने और ग्रहों की तपिश मिटाने के लिए ही धरती पर राग रंग शुरू किए जाते हैं। बुराई की प्रतीक होलिका दहन के बाद सामाजिक खुशियां लाने के लिए फिर रंग गुलाल खेलकर खुशियां मनाई जाती हैं।



ये भी पढ़ें...Chamoli: मलारी हाईवे के पास पहाड़ी से गिरी चट्टान, BRO का 52 फीट लंबा पुल टूटा, आवाजाही हुई बंद

व्यस्त जिंदगी एवं नई जीवन शैली ने होली और रंगों का वह पुराना स्वरूप तो बदल दिया है। एक जमाना था जब धर्मनगरी पंचपुरी की होली वसंत पंचमी से भी पांच दिन पूर्व शुरू हो जाती थी। वह धूमधाम और भारी शोर शराबे वाली होली आज भी लोग याद करते हैं। ज्वालापुर और कनखल की गलियों में महिलाओं की टोलियां लिए गले में पड़ी ढोलक बजाते घर घर महफिल सजाया करती था। होलाष्टक लगते ही ऐसी धूम मचती मानों पूरा शहर ही घरों से गलियों में निकल आया हो।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed