फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   himalayan bird decreased in uttarakhand

देवभूमि में सिमट रहा है हिमालयी पक्षियों का संसार, इसके पीछे है ये वजह

Thu, 06 Dec 2018 11:01 AM IST
भक्त दर्शन पांडेय, अमर उजाला, पिथौरागढ़
भक्त दर्शन पांडेय, अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Thu, 06 Dec 2018 11:01 AM IST
विज्ञापन
himalayan bird decreased in uttarakhand
MONAL

हिमालयी पक्षियों की संख्या तेजी से घट रही है। कुछ समय पहले तक करीब 60 के समूह में दिखने वाले पक्षी अब केवल 20 के समूह में दिख रहे हैं। 

विज्ञापन


उत्तराखंड और हिमाचल के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पक्षियों की 350 प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से 330 प्रजातियां पिथौरागढ़ जिले केमुनस्यारी क्षेत्र में मौजूद हैं। पिछले कुछ वर्षों में मोनाल, सतीर ट्रगोपन, कोक्लास फिजेंट, कालीज फिजेंट, चीयर फिजेंट, स्नोकॉक और स्नो पार्ट्रिज जैसे हिमालयी पक्षियों की संख्या में काफी कमी देखी गई है। पक्षी विशेषज्ञ मौसम परिवर्तन, अवैध शिकार और खेती, बागवानी आदि की पर्वतीय क्षेत्र में कमी को इसका प्रमुख कारण मानते हैं। 
विज्ञापन


विशेषज्ञों के अनुसार उच्च हिमालयी क्षेत्रों में शीतकाल में अधिक बर्फबारी होने पर पक्षी भोजन की तलाश में घाटियों की ओर रुख करते हैं। यही इन पक्षियों के प्रजनन का समय भी होता है। माइग्रेशन पर आए इन पक्षियों का जमकर शिकार भी किया रहा है। हिमालयन पक्षियों पर अध्ययन कर रहे हिमल प्रकृति संस्था के कार्यकर्ता राम नारायण का कहना है कि मुनस्यारी के बलाती, कालामुनि, बिटलीधार, पातलथौड़ में पक्षियों की संख्या में काफी कमी देखी गई है। जो पक्षी पहले 60 के झुंड में आते थे, अब केवल 15 से 20 की संख्या में दिखाई देते हैं।  
विज्ञापन
विज्ञापन


मोनाल का उच्च हिमालयी क्षेत्र में भी हो रहा शिकार
उत्तराखंड का राज्य पक्षी मोनाल का घाटियों के साथ ही उच्च हिमालयी क्षेत्र में भी शिकार हो रहा है। उच्च हिमालयी क्षेत्र में पाया जाने वाला यह पक्षी हिमपात होने के बाद निचली घाटियों में आता है। यहां पर शिकारी मांस के लिए इसका शिकार करते हैं। अप्रैल में यह पक्षी फिर से उच्च हिमालयी क्षेत्र में चला जाता है, लेकिन अब यह वहां पर भी सुरक्षित नहीं है। यारसा गंबू के दोहन के लिए बुग्यालों में जा रहे कई  लोग मोनाल का अवैध शिकार कर रहे हैं। 

उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्नो फाल होने के बाद मोनाल सहित अन्य हिमालयी फीजेंट निचले इलाकों में माइग्रेशन करते हैं। इसी अवधि में यह पक्षी प्रजनन करते हैं। अन्य पक्षियों की तरह फीजेंट माइग्रेशन पर लंबी दूरी पर नहीं जाते हैं। पिछले एक दशक के भीतर कितनी कमी आई और क्या बदलाव आए हैं इसके लिए विस्तृत अध्ययन किए जाने की जरूरत है। 
- प्रो.सीएस नेगी, जंतु विज्ञानी

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed