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Himalaya Diwas 2020: पर्वतारोहण और ट्रैकिंग के जरिए हिमालय बन सकता है रोजगार का दरिया

Wed, 09 Sep 2020 12:44 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 09 Sep 2020 12:44 PM IST
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Himalaya Diwas 2020: Himalayas can give become employment opportunities through mountaineering and trekking
उच्च हिमालयी ट्रैकिंग और पर्वतारोहण रोमांच के शौकीन पर्यटकों के बीच तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। पर्वतारोहण एवं ट्रैकिंग के मौजूदा अवसरों के बीच हर साल बड़ी संख्या में पर्वतारोही एवं पर्यटक यहां पहुंचते हैं, जिससे सैकड़ों स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है।
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हिमालय में अकेला एवरेस्ट हिमशिखर नेपाल देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है। ऐसे में यदि गढ़वाल हिमालय क्षेत्र को एक्सप्लोर कर यहां व्यवस्थित ढंग से पर्वतारोहण एवं उच्च हिमालयी ट्रैकिंग को बढ़ावा दिया जाए तो यहां भी रोजगार का दरिया बह सकता है।
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साथ ही भारत-चीन सीमा पर स्थित चोटियों और दरों तक भारत की ओर से पर्वतारोहियों एवं पर्यटकों की आवाजाही सीमावर्ती क्षेत्र पर भारत के दावे को और मजबूत करेगी।

 

अपार संभावनाएं

गंगोत्री हिमालय क्षेत्र में ट्रैकिंग और पर्वतारोहण की अपार संभावनाएं हैं। सतोपंथ, शिवलिंग, भागीरथी एवं गंगोत्री श्रृंखला आदि दर्जनों हिमशिखर तथा कालिंदी, लमखागा, उडनकोल, धूमधारकांठी, बडासू, बालीपास आदि दर्रों से गुजरने वाले उच्च हिमालयी ट्रैकों की मौजूदगी के कारण हिमालय रोमांच के शौकीन पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना है।

जबकि भारत-चीन सीमा क्षेत्र होने के कारण इनर लाइन की बंदिश के चलते यहां हिमालय के कई हिमशिखर एवं ट्रैक अनछुए हैं। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान(निम) के प्रधानाचार्य कर्नल अमित बिष्ट का कहना है कि हिमालय को समझने के लिए पर्वतारोहण एवं ट्रैकिंग से बेहतर कोई जरिया नहीं है।

उत्तरकाशी जिले में ही हिमालय का करीब 40 फीसदी हिस्सा अभी तक अनएक्सप्लोर्ड है। इसी साल केंद्र सरकार ने उत्तराखंड राज्य में 117 हिमशिखरों को इनर लाइन की बंदिश से मुक्त कर दिया है। इससे निश्चित ही यहां पर्वतारोहण एवं उच्च हिमालयी ट्रैकिंग को बढ़ावा मिलेगा।

अनुमति की प्रक्रिया को आसान बनाने की जरूरत

उत्तराखंड में पेचीदा नियमों और अनुमति की लंबी प्रक्रिया के चलते अभी तक पर्वतारोहण एवं उच्च हिमालयी ट्रैकिंग को अपेक्षित बढ़ावा नहीं मिल पाया है।


इस कारोबार से जुड़े जयेंद्र राणा, भागवत सेमवाल, दीपेंद्र पंवार, अरविंद उनियाल आदि का कहना है कि हिमालय को जानने एवं समझने के लिए बड़ी संख्या में रोमांच के शौकीन पर्यटक उत्तराखंड आना चाहते हैं, लेकिन भारी भरकम शुल्क और अनुमति की पेचीदा प्रक्रिया के कारण अधिकांश हिमाचल, लद्दाख, सिक्किम आदि राज्यों का रुख कर रहे हैं।

उन्होंने उत्तराखंड में पर्यटन, तीर्थाटन, साहसिक पर्यटन, पर्वतारोहण, उच्च हिमालयी ट्रैकिंग आदि के लिए सिंगल विंडो सिस्टम बनाकर अनुमति की प्रक्रिया को आसान बनाने पर जोर दिया।

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