हाइकोर्ट: ईवीएम से छेड़छाड़ मामले में केंद्र और चुनाव आयोग को राहत, जानें पूरा मामला
कोर्ट ने कहा कि याचिका की सुनवाई के दौरान निर्वाचन अधिकारियों को बतौर गवाह कोर्ट में बुलाया जा सकता है। याचिकाकर्ताओं को तीन सप्ताह में संशोधित पक्षकारों की सूची पेश करने को भी कहा है।
न्यायमूर्ति सर्वेश कुमार गुप्ता की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। विधानसभा चुनाव के बाद नवप्रभात ने मुन्ना सिंह चौहान, राजकुमार ने खजान दास, अंबरीश कुमार ने अवदेश कुमार चौहान, प्रभु लाल बहुगुणा ने उमेश शर्मा काऊ, गोदावरी थापली ने गणेश जोशी, विक्रम सिंह नेगी ने विजय सिंह पवार, चरण सिंह ने यतीशवरानंद के चुनाव को चुनौती दी थी।
याचिकाओं में पक्षकार न बनाए जाने की प्रार्थना की
याचिकाकर्ताओं की ओर से ईवीएम के साथ छेड़छाड़ होने की शिकायत की थी। जिसमें राज्य निर्वाचन आयोग, भारत निर्वाचन आयोग, जिला निर्वाचन अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया था। इसके खिलाफ चुनाव आयोग ने खुद को चुनाव याचिकाओं में पक्षकार न बनाए जाने की प्रार्थना की थी।
प्रार्थना पत्र में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने माइकल फर्नाडिस, बी सुंदरारामी रेड्डी और ज्योति बसु नामक मामलों में अवधारित किया है कि निर्वाचन आयोग को पक्षकार नहीं बनाया जा सकता है। याचिकाकर्ताओं की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी के केस में निर्वाचन आयोग को वोटर वेरिफियेवल पेपर आडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) यूज करने और केंद्र सरकार को इस हेतु आवश्यक धनराशि अवमुक्त करने के निर्देश दिए थे। \
इसके बावजूद निर्वाचन आयोग ने उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में तीन विधानसभाओं को छोड़कर अन्य में वीवीपीएटी का प्रयोग नहीं किया है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाइकोर्ट की एकलपीठ ने याचिकाओं में पक्षकार बनाए गए भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखंड, केंद्र सरकार और जिला निर्वाचन अधिकारियों को याचिका में पक्षकारों की सूची से हटाने के निर्देश दिए।