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केदारनाथ आपदा पर HC ने लगाई फटकार कहा, ‘लकवाग्रस्त हो गई थी सरकारी मशीनरी'
गिरीश रंजन तिवारी/ अमर उजाला, नैनीताल
Updated Sun, 20 Nov 2016 11:36 AM IST
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केदारनाथ आपदा के दौरान राहत कार्यों को अंजाम देने तथा उसके बाद पुनर्वास संबंधी कार्यों के लिए हाईकोर्ट ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। आपदा से संबंधित जनहित याचिकाओं को लेकर दिए गए फैसले में कोर्ट ने कई सख्त टिप्पणियां की। कोर्ट ने साफ कहा कि इतनी बड़ी आपदा का सामना करने के लिए सरकार कभी तैयार ही नहीं थी।
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सरकारी तंत्र लकवाग्रस्त हो गया था और इस आपदा का सामना करने के लिए कभी वह उठकर खड़ा ही नहीं हुआ। जून, 2013 की केदारनाथ आपदा के समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और उस समय विजय बहुगुणा मुख्यमंत्री थे। आपदा के बाद सरकार की ओर से लगातार बेहतरीन राहत और बचाव कार्य का दावा किया जाता रहा। शनिवार को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इन तमाम दावों को दरकिनार कर दिया।
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वरिष्ठ न्यायामूर्ति राजीव शर्मा व आलोक सिंह की खंडपीठ ने कहा कि सरकार ने राहत कार्य शुरू करने में बहुत देरी की, जिसके कारण संपत्ति की क्षति और मृतकों की संख्या में इजाफा हुआ तथा फंसे यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गईं। प्रभावी आपदा प्रबंधन और राहत के लिए सरकार को तुरंत ही सेना, एयरफोर्स, पैरामिलिट्री, नेशनल डिजास्टर, रिलीफ फोर्स को तैनात करना चाहिए था।
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कोर्ट ने बाद में राहत में बेहतरीन कार्य के लिए सेना, एयरफोर्स, पैरामिलिट्री की भूमिका की ऑन रिकार्ड सराहना भी की और कहा कि राहत में बीस राहत कर्मिंयों को जान भी गंवानी पड़ी। कोर्ट ने आश्चर्य जताया कि सरकार ने मृतकों का डीएनए रिकार्ड रखे जाने का काम शुरू करने के बाद अकारण बंद कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि सरकार ने यात्रा मार्गों पर पड़ने वाले शहरों में सीवेज डिस्पोजल की व्यवस्था आज तक नहीं की जिसके चलते शहरों का जहां तहां एकत्र सीवेज व कूड़ा बरसात में उनसे लगी नदियों में समा जाता है। इसका इतना गंभीर परिणाम हुआ है कि नदियों का पानी इतना प्रदूषित हो गया है कि उसमें जलीय जीव जंतु पनप नहीं पा रहे और गंगा जल आचमन योग्य नहीं रह गया।
कोर्ट ने चार धाम यात्रा मार्ग के कस्बों और शहरों में अनियोजित विकास का भी जिक्र किया और कहा कि सतत विकास (सस्टेनेबल डेवलपमेंट) की अवधारणा को देखते हुए क्षेत्र विशेष की भार वहन क्षमता के तहत ही विकास योजनाओं को बनाया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ग्लेशियर क्षेत्रों में लोगों को अनियंत्रित तरीके से जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। इसी तरह कोर्ट ने यह भी कहा कि चार धाम यात्रा रूट पर भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगनी चाहिए।