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पंचायत चुनाव : हाईकोर्ट पर टिकी नजरें

Tue, 03 Dec 2013 11:20 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 03 Dec 2013 11:20 AM IST
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hearing of panchayt election will be tomorrow

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर अब हर किसी को मंगलवार को आने वाले हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार है।

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चुनाव कब होंगे, नए परिसीमन और पंचायतों में प्रशासक तीनों मसलों पर कोर्ट का फैसला आना है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि नया परिसीमन हुआ तो चुनाव जनवरी में करना संभव नहीं होगा।

विभाग को कोर्ट में जवाब देना है
पंचायत चुनाव की तिथि घोषित करने और पंचायतों में प्रशासक को लेकर कोर्ट के फैसले के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। पंचायत राज विभाग के अधिकारियों का कहना है कि विभाग को कोर्ट में जवाब देना है।
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यदि पूर्व में घोषित कार्यक्रम के अनुरूप चुनाव कराने पड़े तो आरक्षण सूची फाइनल कर निर्धारित तिथि में चुनाव करा दिए जाएंगे। विभाग की ओर से आरक्षण की सूची तैयार है।

बेहद टाइट शेड्यूल में होंगे पंचायत चुनाव
पंचायत चुनाव सरकार को तीन माह का काम दो माह में करना होगा। नए सिरे से परिसीमन में ही कम से कम तीन माह का वक्त चाहिए। इसके बाद सरकार को आरक्षण भी तय करना है।

दूसरी ओर परिसीमन होने के बाद ही मतदाता सूचियों के सुधार का काम करने में भी राज्य निर्वाचन आयोग को करना है। इसके लिए भी कम से कम दो माह का समय चाहिए। जाहिर है कि सरकार को अब बेहद टाइट शेड्यूल में काम करना होगा।

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राज्य निर्वाचन आयोग यह स्पष्ट कर चुका है कि 28 मार्च से पहले चुनाव पूरे होने हैं। ऐसे में सरकार के पास चुनाव कराने के लिए सिर्फ चार माह का समय है। इसमें भी परिसीमन और आरक्षण के लिए तीन माह का समय है।

कम से कम तीन माह का समय चाहिए

पंचायत विभाग के अधिकारियों के मुताबिक 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कराने के लिए कम से कम तीन माह का समय चाहिए। पर इसके बाद आरक्षण भी होना है और आरक्षण तय होने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम जारी हो पाएगा।

कम से कम 45 दिन आचार संहिता के लिए निकाल लिए जाएं तो परिसीमन और आरक्षण के लिए सरकार के पास सिर्फ ढाई माह का समय है। ऐसे में तीन माह के काम को सरकार को दो माह से भी कम समय में पूरा करना होगा।

हालांकि पंचायत चुनाव के जानकार इस काम को मुश्किल भी नहीं मान रहे हैं। जिला पंचायत सदस्य संठन के प्रदेश अध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट का कहना है कि परिसीमन का काम तीन मैदानी जिलों में अधिक है। पौड़ी और चमोली में ग्रामीण जनसंख्या में 2001 की तुलना में कमी आई है, लिहाजा यहां परिसीमन की खास जरूरत नही है।


नैनीताल, उधमसिंहनगर और देहरादून में ग्रामीण जनसंख्या में 1.27 लाख का इजाफा हुआ है। ऐसे में इन तीन जिलों पर फोकस करते हुए और नई ग्राम पंचायतों के गठन को ध्यान में रखते हुए परिसीमन को डेढ़ माह में पूरा किया जा सकता है।

इसी तरह जिला पंचायत और ब्लॉक के आरक्षण को जस का तस रखते हुए ग्राम पंचायतों के आरक्षण को भी समय से निपटाया जा सकता है।

शासन जुटा तैयारी में
सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को कोर्ट में पेश करने के लिए पंचायत विभाग ने होमवर्क करीब-करीब पूरा कर लिया है। यह देखा जा रहा है कि कौन सा काम कितने समय में किया जा सकता है।

मुसीबत यह है कि पंचायत चुनाव ही नहीं कराने बल्कि पंचायतों का गठन भी 28 मार्च से पहले हो जाना चाहिए। ऐसे में पंचायत चुनाव के लिए टाइट शेड्यूल बनाना सरकार की मजबूरी बन रहा है।

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