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दलित वोट बचाने को हाथ-पैर मार रहे कांग्रेसी CM

Thu, 12 Feb 2015 02:13 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हल्द्वानी
ब्यूरो / अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Thu, 12 Feb 2015 02:13 PM IST
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harish rawat play dalit card in uttarakhand.

कांग्रेस से दलित वोट बैंक खिसकने का असर उत्तराखंड में दिखने लगा है। बुधवार को अनुसूचित जाति-जनजाति महापंचायत में बुधवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जिस तरह दलित कार्ड खेला, उसे इसी नजर से देखा जा रहा है।

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महापंचायत में सीएम ने न सिर्फ दलित वर्ग से कांग्रेस का पुराना रिश्ता बताया बल्कि उनके लिए कई घोषणाएं भी कीं। जिसमें बाबा साहब के नाम से राज्य में दो मेडिकल कालेज और जगजीवन राम के नाम पर चार पालीटेक्निक खोलने की घोषणा प्रमुख है।
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यही नहीं अनुसूचित जाति-जनजाति के महापुरुष खुशीराम और जयानंद भारती के नाम से पार्क बनवाने की भी बात कही। इसके साथ ही अनुसूचित जाति-जनजाति को कानूनी सलाह और सहायता के लिए हाईकोर्ट में तीन वकील नियुक्ति करने का वादा भी किया।
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रामलीला मैदान में आयोजित महापंचायत में सीएम ने कहा कि कुछ लोग संविधान की प्रस्तावना से मूल भावना समता, समाजवाद और धर्म निरपेक्षता को हटाना चाहते हैं। संविधान से छेड़छाड़ की गई तो आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उपनल के तहत आउटसोर्स से रखे जाने वाले कर्मियों में भी आरक्षण व्यवस्था लागू की जाएगी।

संवैधानिक पदों की रिक्तियों को 15 दिनों के भीतर भरा जाएगा। कहा कि प्रमोशन में आरक्षण का नया फार्मूला जल्द ही निकाल लिया जाएगा। वित्त मंत्री डॉ. इंदिरा हृदयेश ने कहा कि आरक्षण कोटे के पद सामान्य से नहीं भरे जाएंगे।

आउटसोर्स से भरे जाने वाले पदों पर आरक्षण लागू किया जाएगा। निजी सेक्टरों ने अगर दबाव बनाया तो केंद्र सरकार से बात कर एक्ट बनाकर व्यवस्था को लागू करेंगे।

यूं ही नहीं उमड़ा सीएम का यूएसनगर प्रेम

harish rawat play dalit card in uttarakhand.

राजीव पांडेय/ अमर उजाला, रुद्रपुर

रुद्रपुर में वर्ग चार की भूमि मामले में कैबिनेट की मुहर लगाने के बाद जैसे ही पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने 15 फरवरी को धन्यवाद रैली करने का ऐलान किया वैसे ही मुख्यमंत्री हरीश रावत सतर्क हो गए। बहुगुणा के पहुंचने से चार दिन पहले यानी बुधवार को ही सीएम रुद्रपुर पहुंच गए।

कार्यकर्ताओं से मिले, जनता से पूरी आत्मीयता से मुलाकात की और समस्याएं भी सुनीं। ऊधमसिंह नगर से रावत के इस प्रेम को बहुगुणा बनाम रावत की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री को देखकर साफ लग रहा था कि उनकी जिले में सक्रियता और रुचि अब अधिक है।

यह भी कहा जा रहा है कि रावत अब बहुगुणा को काम से जवाब देने की कोशिश कर रहे हैं। इसके पीछे एक  कारण यह भी है कि सीएम का रुद्रपुर का यह दौरा प्रस्तावित ही नहीं था। सीएम पद से इस्तीफा देने के एक साल बाद बहुगुणा फिर से सक्रिय हुए और उन्होंने वर्ग चार की भूमि के नियमितीकरण के बहाने मुख्यमंत्री हरीश रावत पर निशाना साधा।

यहां तक की रैली की चेतावनी भी दी। अब कैबिनेट से मांग तो पूरी हो गई लेकिन श्रेय लेना बाकी है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री रावत अपने हल्द्वानी दौरे के एक दिन पहले ही कैबिनेट में इसे मंजूरी दिला दी।

बताया जा रहा है कि सीएम का ऊधमसिंह नगर में कोई कार्यक्रम प्रस्तावित नहीं था। लेकिन वे अचानक बुधवार को जिला मुख्यालय पहुंच गए। बता दें कि इससे पहले सीएम ने 17 नवंबर को जिले में एक जनसभा की थी।

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