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हरिद्वार: मातृ सदन के स्वामी शिवानंद का अनशन समाप्त, गंगा की निर्मलता और अविरलता के लिए कर रहे थे संघर्ष
Thu, 03 Sep 2020 12:02 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Thu, 03 Sep 2020 12:02 PM IST
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स्वामी शिवानंद
- फोटो : AmarUjala
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केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की ओर से मातृसदन की मांगों को गंभीरता से लिए जाने और नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) की ओर से लिखित में आश्वासन मिलने पर मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने अनशन समाप्त कर दिया है।
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मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने छह सूत्री मांगों को लेकर तीन अगस्त से अनशन शुरू किया था। उन्होंने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री पर लॉकडाउन के दौरान गंगा में अवैध खनन कराने के आरोप लगाए थे।
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अनशन के दौरान 29 अगस्त को गंगा विचार मंच के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. भरत पाठक एवं स्वच्छ भारत अभियान के ब्रांड आंबेसडर डॉ. नंदिता पाठक स्वामी शिवानंद से अनशन समाप्ति के अनुरोध के लिए मातृसदन आए थे। स्वामी शिवानंद ने अपना संदेश केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को जारी किया। मातृसदन की मांग के मामले में 2 सितंबर को जल शक्ति मंत्रालय ने बैठक कर विचार विमर्श किया। ताकि उनकी उचित मांग पर और उनके स्वास्थ्य को ध्यान रखते हुए कोई ठोस नतीजे पर पहुंचा जाए।
बुधवार की देर रात को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा के पत्र को लेकर गंगा विचार मंच के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. भरत पाठक, मंच के प्रदेश सह संयोजक आशीष कुमार झा और उनके सहयोगी जिला संयोजक मनोज शुक्ला, अंश मल्होत्रा मातृसदन पहुंचे। बुधवार रात को ही स्वामी शिवानंद ने अनशन को समाप्त कर दिया।
पत्र में यह मिला आश्वासन
निदेशक ने पत्र के माध्यम से स्वामी शिवानंद को अवगत कराया कि आपके आग्रह पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को सख्ती के साथ निर्देश दिए गए हैं कि खनन पर रोक लगाई जाए। गंगा से संबंधित अन्य विषयों पर भी सरकार गंगा संरक्षण के लिए कटिबद्ध है। किसी भी सूरत में गंगा के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
मातृसदन की प्रमुख मांगे
- उत्तराखंड में गंगा और उसकी सहायक नदियों पर निर्माणाधीन व प्रस्तावित सभी जलविद्युत परियोजनाएं बंद हों।
- हरिद्वार में गंगा और सहायक नदियों में खनन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगे।
- नदियों के पांच किमी के दायरे तक लगे स्टोन क्रशर बंद हों।
- स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद की ओर से प्रस्तावित गंगा एक्ट को लागू किया जाए।
- ज्ञानस्वरूप सानंद की मौत, ब्रह्मचारी संत आत्मबोधानंद और साध्वी पद्मावती की हत्या की साजिश रचने की उच्च स्तरीय जांच हो।
- एनएमसीजी के नौ अक्तूबर 2018 के आदेश को अंतिम रूप देकर प्रधानमंत्री को एक अक्तूबर 2019 को सूचित करने के बाद जिन व्यक्तियों ने इसके विपरीत कार्य किया, उसकी उच्चस्तरीय जांच हो।