हरिद्वार : संतों की बैठक में कांग्रेस नेता सतपाल ब्रह्मचारी और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक भिड़े
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हरिद्वार के आश्रम और अखाड़ों की समस्याओं पर मंथन करने व आगे की रणनीति बनाने के लिए बुलाई गई संतों की बैठक राजनीति की भेंट चढ़ गई। बैठक में पूर्व पालिकाध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक एक दूसरे से भिड़ गए। दोनों ने एक दूसरे पर आरोप लगाया कि उनकी पार्टी की सरकार के समय ही आश्रम और अखाड़ों पर कई तरह के टैक्स थोपे गए। दोनों के बीच हुई तीखी नोकझोंक के बाद कैबिनेट मंत्री ने समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया तो सतपाल ब्रह्मचारी ने चेेतावनी दी कि यदि सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया तो वह संतों के साथ धरने पर बैठने को मजबूर हो जाएंगे।
मालूम हो कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शहर के सभी अखाड़ों और आश्रमों को नोटिस जारी करके एसटीपी लगाने को कहा है। बोर्ड ने एसटीपी नहीं लगाने पर कार्रवाई की चेतावनी जारी की हुई है। इस बात को लेकर सभी अखाड़े और संतों में उबाल है। इसी मुद्दे को लेकर युवा भारत साधु समाज ने कनखल स्थित हरेराम आश्रम में बैठक बुलाई थी। बैठक में संतों के साथ पूर्व पालिकाध्यक्ष और राधाकृष्ण धाम के संस्थापक सतपाल ब्रह्मचारी मौजूद थे। कुछ देर बाद वहां शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक भी पहुंच गए। सतपाल ब्रह्मचारी ने आश्रमों के साथ शहर की सड़कों को बार बार खोदने पर बोलना शुरू किया।
उन्होंने कहा था विकास कार्यों को लेकर भाजपा सरकार के पास कोई योजना नहीं। आश्रमों पर व्यावसायिक बिजली के बिल और हाउस टैक्स थोपे जा रहे हैं। इस बात को लेकर मदन कौशिक ने राजनीति नहीं करने को कहा तो दोनों के बीच नोकझोंक हो गई। सतपाल ब्रह्मचारी ने कहा कि यदि प्रदेश सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है तो वह साधु संतों के साथ धरना प्रदर्शन करने को मजबूर हो जाएंगे। इसके बाद बैठक में शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने सारी समस्याओं के लिए कांग्रेस सरकारों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के शासनकाल में ही अखाड़ों और आश्रमों पर हाउस टैक्स लगाया गया। इसके बाद फिर दोनों लोगों में बहस हो गई। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि पीसीबी के नोटिस से प्रदेश सरकार का कोई रोल नहीं है।
सरकार देगी पंजीकरण का पैसा
कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि हर मामले में राजनीति की जाती है। इस पर उन्होंने आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अब भी अखाड़ों और आश्रमों की समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर है। अखाड़ों और आश्रमों को एसटीपी नहीं बनाना होगा। केवल वह बोर्ड को लिखकर दे देंगे कि उनके यहां सीवर लाइन है। बोर्ड में पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण का शुल्क सरकार जमा कराएगी।
केवल आश्वासन से नहीं चलेगा काम
सतपाल ब्रह्मचारी का कहना है कि प्रदेश सरकार ने शहर में एक धेले का काम नहीं किया। केवल केंद्र के बजट से काम हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बैठक में कैबिनेट मंत्री ने केवल आश्वासन मात्र दिया है। केवल आश्वासन देने से काम नहीं चलेगा। सरकार को शासनादेश जारी करके आश्रमों को हाउस टैक्स और बिजली के व्यावसायिक बिल से मुक्ति देनी चाहिए।
कनखल में कुंभ काम नहीं होने पर संत नाराज
बैठक में कुछ संतों ने इस बात पर नाराजगी जताई कि कनखल में गंगा किनारे कोई नया घाट नहीं बनाया। महामंडलेश्वर स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि प्रदेश सरकार और कुंभ मेला प्रशासन केवल अखाड़ों के साथ बैठक करता है। आश्रमों के संतों को नहीं बुलाया जाता। उन्होंने कहा कि भविष्य में आश्रमों के संतों केे बुलाया चाहिए।
बैठक में यह संत रहे मौजूद
महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी, कपिल मुनि, स्वामी रूपेंद्र प्रकाश, महंत स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी हरीहरानंद, स्वामी दिनेश दास, महामंडलेश्वर स्वामी संतोषानंद महाराज, स्वामी प्रेमानंद, महंत जगजीत सिंह, स्वामी श्रवण मुनि, स्वामी गणेशनाथ, महामंडलेश्वर शिवानंद, स्वामी सच्चिदानंद, महंत सत्यव्रता नंद आदि मौजूद रहे।