फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Haridwar Kumbh Mela 2021 latest news : on last Snan, the three Bairagi ariyan are decorated with special tilakas

हरिद्वार कुंभ 2021 : अंतिम कुंभ स्नान के दिन विशेष तिलकों से सजती हैं तीनों बैरागी आणियां

Sun, 25 Apr 2021 12:04 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 25 Apr 2021 12:04 PM IST
सार

कुंभ का अंतिम स्नान चूंकि तीनों बैरागी अणियों के लिए सबसे बड़ा है। लिहाजा इस दिन वैष्णवों का तिलक वैभव दर्शनीय होगा।

विज्ञापन
Haridwar Kumbh Mela 2021 latest news : on last Snan, the three Bairagi ariyan are decorated with special tilakas
हरकी पैड़ी पर कुंभ स्नान - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

संत चाहे संन्यासी हों, बैरागी, उदासी अथवा निर्मले। किसी भी मढ़ी से हों या फिर वैष्णवों के चर्तु: संप्रदाय से, सर्वाधिक श्रृंगार उस दिन करते हैं, जब शाही स्नान की जमात हरकी पैड़ी पर कुंभ स्नान करने जाती है।

विज्ञापन


हरिद्वार महाकुंभ 2021 : प्रतीकात्मक रूप से हरकी पैड़ी पर देव डोलियों ने किया कुंभ स्नान
विज्ञापन


कुंभ का अंतिम स्नान चूंकि तीनों बैरागी अणियों के लिए सबसे बड़ा है। लिहाजा इस दिन वैष्णवों का तिलक वैभव दर्शनीय होगा।

साथ ही श्रीमहंतों और खालसों की तिलक पहचान भी मन मोह लेगी। स्नान के लिए जाते बैरागी संत कुमकुम, रोली, चंदन और केसर का तिलक लगाते हैं। कुछ बैरागी भुजाओं और मस्तक पर भस्म भी मलते हैं। संन्यासी अखाड़ों के नागा जहां 16 प्रकार के तिलक लगाते हैं तो वहीं बैरागी साधु 64 प्रकार के तिलकों से सज धजकर गंगा नहाने जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

हरिद्वार महाकुंभ 2021 : चैत्र पूर्णिमा पर अखाड़ों के साथ स्नान के लिए नहीं जाएंगे आम लोग 


तीनों अणियों के लिए तिलक अलग-अलग हैं। जानकर लोग बैरागी बाबा के तिलक को देखकर पता लगा लेते हैं कि वे किस अखाड़े से हैं। तिलक में भी भेद है और ये साधना पद्धति का बखान भी कर देते हैं। बैरागियों के श्रीमहंतों, खालसों और मंडलेश्वरों के तिलक ही उनके पद की पहचान हैं।

स्नान के रास्ते में जमा हजारों श्रद्धालु विशिष्ट बाबाओं का विशेष सम्मान करते हैं। ये बाबा शरीर के बारह स्थानों पर तिलक लगाते हैं। इनमें मस्तक, ललाट, कंठ, नाक, कान, दोनों बाजू और सीना प्रमुख हैं।

शाही जुलूस में अखाड़ों के साधु-संत सीमित संख्या में स्नान करेंगे

आईजी कुंभ और मेला अधिकारी ने 27 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा के शाही स्नान की व्यवस्थाओं को लेकर बड़े अखाड़े के पदाधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया। इस दौरान संतों ने कहा कि शाही स्नान के दौरान अखाड़े कोरोना की सभी गाइडलाइन का पालन करेंगे। शाही स्नान के लिए जाते समय जुलूस में आम लोगों को शामिल नहीं किया जाएगा।

आईजी कुंभ संजय गुंज्याल और मेला अधिकारी दीपक रावत ने तीनों बैरागी अखाड़ों और बड़ा उदासीन अखाड़े के संतों श्रीमहंत दुर्गादास, श्रीमहंत महेश्वर दास, श्रीमहंत अद्वेतानंद, कोठारी दामोदर दास, व्यास मुनि, निर्मल अखाड़े से देवेंद्र शास्त्री, कोठारी जसविंदर सिंह, नया उदासीन के सचिव जगतार मुनि से मुलाकात की।

अखाड़ों के पदाधिकारियों ने आईजी और मेला अधिकारी को आश्वासन दिया कि चैत्र पूर्णिमा के शाही स्नान के दौरान उत्तराखंड सरकार की सभी गाइडलाइन का पूरी तरह से पालन किया जाएगा। शाही जुलूस में अखाड़ों के साधु-संत सीमित संख्या में स्नान करेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed