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जान बचाने को दंपत्ति ने कैसे लाठी डंडों से पीट-पीटकर गुलदार को उतारा मौत के घाट, देखें तस्वीरें

Sun, 26 Mar 2017 10:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Sun, 26 Mar 2017 10:28 AM IST
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guldar attack on two villager
- फोटो : amarujala

सिडकुल थाना क्षेत्र के गांव रावली महदूद में तड़के एक गुलदार ने दंपित्त पर हमला कर घायल कर दिया। तभी लोगों ने गुलदार पर लाठी-डांडों से हमला करके दंपित्त को गुलदार से छुड़वाया। इस दौरान पहले से ही घायल गुलदार की मौत हो गई। वन विभाग के अधिकारियों ने गुलदार के शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया। जबकि घालय संपित्त को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।    


 

guldar attack on two villager
- फोटो : amarujala

शनिवार की तड़के करीब चार बजे पहले से ही घायल एक गुलदार रावली महदूद गांव में ओमपाल आ घुसा। इस दौरान शौच के लिए जा रहे संतराम और उसकी पत्नी गुडडी निवासी नहटोर जिला बिजनौर पर गुलदार ने अचानक हमला कर दिया। गुलदार के हमले से संतरात ओर गुडडी जख्मी हो गई। तभी शोर-शराबे की आवाज सुनकर गुुडडी के भाई ओमी और एक अन्य युवल ने लाठी-डंडों पर गुलदार पर घमला करते हुए संतराम और गुडडी को गुलदार से छुड़वाया।

guldar attack on two villager
- फोटो : amarujala

इस दौरान पहले से घायल गुलदार की मौत हो गई। संतराम और गुडडी को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दोनों के हाथ-पैर और सिर पर गुलदार के पंजे और दांत के निशान बने हुए है। सुचना पर मौके पर पहुंचे वनक्षेत्राधिकरी हरिद्वार महेश प्रसाद सेमवाल और वन दरोगा ओपी सिंह ने गुलदार के शव अपने कब्जे में ले लिया। वनक्षेत्राधिकरी कार्यालय पर डॉ. रिचा और डॉ. अशोक ने गुलदार के शव का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम के बाद यहीं पर गुलवार के शव को जला दिया गया। गुलदार के शरीर पर घाव के गहरे निशान बने हुए है।       

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guldar attack on two villager
- फोटो : amarujala

 दंपित्त संतराम और गडडी करीब 30 मिनट तक गुलदार से संघर्ष करते रहे। संघर्ष के दौरान दोनों गंभरी रुप से घायल भी हो गए। पहले से घायल होने पर गुलदार अपने पूरी शक्ति के साथ हमला नहीं कर पाया। जिसके चलते दोनों की जान बच गई।       
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guldar attack on two villager
- फोटो : amarujala

करीब एक साल पहले जून 2016 में एक बीमार गुलदार निर्मल बाग के पास आरके जैन के घर आ गया था। तब आरके जैन की बेटी आयुषी ने गुलदार को कमरे में बंद कर दिया था। सूचना पर वन विभाग की टीम गुलदार को पकड़कर ले गई थी। बीमारी के कारण एक हफ्ते बाद इस गुलदार के मौत हो गई थी।      

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