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पीएम बनने के साथ इस रिकॉर्ड पर है मोदी की नजर

Sat, 05 Apr 2014 04:11 PM IST
वडोदरा से विजय त्रिपाठी/ब्यूरो
वडोदरा से विजय त्रिपाठी/ब्यूरो Updated Sat, 05 Apr 2014 04:11 PM IST
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ground report from vadodara by vijay tripathi

वडोदरा में गुपचुप एक बेहद दिलचस्प मुकाबला भी चल रहा है जिसे कम ही लोग जानते हैं। भाजपा प्रत्याशी नरेंद्रभाई मोदी के रणनीतिकारों के मुताबिक, उनकी लड़ाई कांग्रेस प्रत्याशी व राष्ट्रीय महासचिव मधुसूदन मिस्त्री से नहीं बल्कि माकपा के अनिल बासु से है।

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बासु वर्ष 2004 के संसदीय चुनाव में पश्चिम बंगाल की आरामबाग सीट से अब तक के सबसे बड़े मार्जिन पांच लाख 92 हजार वोटों से जीतकर नेशनल रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं। भाजपा भी मोदी की जीत का कुछ ऐसा ही रिकॉर्ड बनाने के ध्येय को लेकर चल रही है।

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गहमागहमी ऐसी मानों मतदान कल ही हों

ground report from vadodara by vijay tripathi

भले चुनाव को अभी करीब महीना भर हो लेकिन पॉश एरिया सयाजीगंज स्थित भाजपा कार्यालय में वोटर लिस्ट को लेकर तैयारियों का स्तर और गहमागहमी ऐसा अहसास कराती है मानों मतदान कल ही हों।

बड़े से हॉल में मोदी की तस्वीर वाला एक बैनर टंगा है जिस पर गुजराती में लिखा है-लक्ष्य प्रेरित बाण हैं हमें ठहरने का काम कैसा, लक्ष्य तक पहुंचे बिना पथ में पथिक विश्राम कैसा।

भाजपाइयों का संकल्प 90 फीसदी मतदान कराने का है। इसके लिए हर भाजपा कार्यकर्ता को मतदाता सूची के एक-एक पेज का प्रमुख बनाया गया है।

संघ भी मददगार बना है

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हर वोटर से कम से कम छह-सात बार संपर्क की रणनीति है। संघ भी इसमें मददगार बना है। कार्यालय प्रभारी बताते हैं कि रोज रात को तीन बज रहा है घर जाते वक्त। शहर अध्यक्ष भारतभाई डांगर कहते हैं कि कांग्रेस यहां है ही नहीं तो लड़ेगी कहां।

कांग्रेस के पास अगर कुछ कहने को है भी तो बस 2002 (यानी गुजरात दंगा)। यहां विकास इतना हुआ है कि हमें ज्यादा बोलना-बताना ही नहीं पड़ रहा है।

शहर में 40 साल में महज तीन फ्लाईओवर बने, मोदी सरकार ने पिछले 10 साल में आठ फ्लाईओवर बना दिए, जबकि चार निर्माणाधीन हैं।

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कांग्रेस का संगठन भाजपा जितना दुरुस्त नहीं

ground report from vadodara by vijay tripathi

आधुनिक सुविधाओं वाला अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्पोर्ट्स कांप्लेक्स बनवाया। आप नया बन रहा बस स्टेशन देखिए, एयरपोर्ट भी इसके आगे फीका है। कांग्रेस का संगठन यहां भाजपा जितना दुरुस्त नहीं है। डांडिया बाजार स्थित जिला कांग्रेस मुख्यालय पहुंचने पर इसका अंदाजा मिलता है।

दो नई एक्जीक्यूटिव चेयर हाल ही में लाई गई दिखती हैं, दरियां बिछाई जा रही हैं। शहर के मजदूर नेताओं की मधुसूदन के साथ बैठक की तैयारी है। राज्य महासचिव अनुज पटेल संगठन की खस्ताहाली स्वीकारते हैं। वे कहते हैं कि फिर भी हमारा 20-25 फीसदी वोट तो कहीं नहीं गया।

चुनाव में गुब्बारा फूटेगा

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सुस्त पड़े संगठन में करंट दौड़ाने के लिए अब मधुसूदन मिस्त्री जी-जान से जुट गए हैं। शुरुआत उन्होंने बृहस्पतिवार को शहर में बिजली के खंभों पर लगे मोदी के पोस्टरों को फाड़ने से कर दी। उनकी शिकायत है कि प्रशासन उन्हें ऐसी जगहों पर पोस्टर लगाने की इजाजत नहीं दे रहा है।

चुनावी हवा पर बात करते हुए मधूसूदन भी राहुल का ही डायलॉग मारते हैं-चुनाव में गुब्बारा फूटेगा। मोदी के लिए अहमदाबाद या सूरत जैसे बड़े शहरों से भी चुनाव लड़कर जीतने का विकल्प था लेकिन यहां से राजसूय यज्ञ का घोड़ा छोड़ने का सीधा सा फार्मूला वही है जो उनके वाराणसी से लड़ने का है।

आसपास की अहम सीटों को अपनी सघन लहर में लाना। मध्य गुजरात की खेड़ा, आणंद, पंचमहल, दाहोद और छोटा उदयपुर संसदीय सीटों का रुख वडोदरा के रुझान से अछूता नहीं रहेगा। इन छह सीटों में से तीन कांग्रेस के पास हैं।

पोस्टर में सिर्फ मोदी

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शहर में प्रमुख चौराहों पर विशालकाय होर्डिंग लगी हैं और इसमें मोदी अकेले ही हैं। इन पर गुजराती भाषा में संदेश हैं-संस्कारीनगरी में आपका स्वागत है, वडोदरा की आवाज बनेगी देश की आवाज, वडोदरा चुनेगा देश का पीएम। और वी फॉर वडोदरा, वी फॉर विक्ट्री। इस नारे में वडोदरा की जगह वाराणसी भी फिट किया जा सकता है।

वडोदरा कई मायनों में वाराणसी जैसा
गंगा किनारे बसी काशी अगर अपनी गंगा मइया की बदहाली पर आंसू बहाती है तो विश्वामित्र की पुत्री विश्वमित्री के नामवाली नदी के तट पर बसा ऐतिहासिक शहर वडोदरा भी इस नदी की दुर्दशा पर दुखी है। यहां के लोगों की मोदी से सबसे बड़ी शिकायत भी यही है।

सीट का स्वभाव
वडोदरा के करीब 14 लाख वोटरों में गैर गुजराती और हिंदीभाषी समाज के लोग अच्छी तादाद में (करीब 18 फीसदी) हैं। मुस्लिम वोटरों की तादाद करीब 20 फीसदी है जो ज्यादातर छोटे-मोटे काम में लगे हैं। भाजपा को इनका पांच फीसदी से ज्यादा वोट मिलता नहीं दिखता। संसदीय क्षेत्र में सभी सात की सात विधानसभा सीटें भाजपा के पास हैं।

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