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आवासीय निर्माण में केंद्र ने बिल्डरों को दी बड़ी राहत

Sun, 18 Dec 2016 11:47 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 18 Dec 2016 11:47 AM IST
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government gave great relief to builders in residential construction
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

आवासीय प्रोजेक्ट के निर्माण में केंद्र सरकार ने बिल्डरों को बड़ी राहत दे दी। पर्यावरण स्वीकृति के लिए निर्माण क्षेत्र का दायरा 20 हजार वर्ग मीटर से बढ़ा कर डेढ़ लाख वर्ग मीटर कर दिया है। इससे साफ है कि आवासीय प्रोजेक्ट में पर्यावरण स्वीकृति लेने का झंझट ही खत्म हो गया है।

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इसके साथ ही केंद्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के संबंध में जिम्मेदारी प्राधिकरणों और भवन निर्माण स्वीकृति देने वाले संस्थानों को दे दी है। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इस संशोधन के संबंध में एनवायरनमेंट असेसमेंट अधिसूचना जारी कर दी है। इससे बिल्डरों को आवासीय प्रोजेक्ट बनाने में बहुत आसानी हो जाएगी।
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अभी तक 20 हजार वर्ग मीटर निर्माण एरिया के लिए केंद्रीय मंत्रालय से पर्यावरण स्वीकृति लेना आवश्यक थी, न लेने पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रोजेक्ट को सील कर देता था। उत्तराखंड में ऐसे 12 बड़े आवासीय प्रोजेक्ट्स का सीजर हो चुका है। संशोधन के बाद यह सीजर अपने-आप समाप्त हो जाएगा। पर्यावरण स्वीकृति के संबंध में हुए संशोधन के पीछे तर्क दिया गया है कि इससे भवन निर्माण सेक्टर को राहत मिलेगी जिससे वर्ष 2022 तक हर किसी को आवास देने का केंद्र का उद्देश्य आसान हो जाएगा।
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शहरी क्षेत्रों के लोगों को आसान कीमत में भवन उपलब्ध हो सकेंगे। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण से संबंधित जांच के दायित्व भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से हटा दिए गए हैं। यह जिम्मेदारी आवास निर्माण की स्वीकृति देने वाली विकास प्राधिकरण, नगर पालिका तथा अन्य संस्थानों को दे दी गई है। यह माना जा रहा है कि भवन निर्माण की स्वीकृति दिए जाने की शर्तों में पर्यावरण संरक्षण के बिंदु भी शामिल होते हैं।


गैरसैंण विधानसभा, मिनी सचिवालय को भी राहत
पर्यावरण स्वीकृति के लिए भवन निर्माण एरिया का दायरा बढ़ाए जाने संबंधी केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के निर्णय से गैरसैंण विधानसभा और मिनी सचिवालय के मामले में भी राहत मिल गई है। विधानसभा और मिनी सचिवालय के लिए अब पर्यावरण स्वीकृति की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। एनजीटी में मामला जाने के बाद इन निर्माणों के लिए पर्यावरण स्वीकृति, बोर्ड की अनुमति न लिए जाने से इन निर्माण को अवैध करार दिया जा रहा था।

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