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अपनी ही कंपनी को गरियाने लगे अधिकारी
अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 18 Sep 2013 01:14 PM IST
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एक बड़ी मोबाइल कंपनी के अधिकारी हैं। वह रोज अपनी सेवाओं के सबसे श्रेष्ठ होने का दावा करते-करते उनकी जुबां नहीं थकती थी, लेकिन बीते सप्ताह अपनी ही जुबां से सेवाओं का ‘सच’ उगल गए।
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हुआ यूं कि घर से पत्नी फोन लगा रही थीं, लेकिन सिग्नल कम होने के चलते उनकी ठीक से बात नहीं हो पाई। बार-बार काल ड्राप हो रही थी। पत्नी की जुबां खुली तो अधिकारी महोदय की बोलती बंद हो गई।
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उन्हें तभी सांस-में-सांस आई जब पत्नी जी का फोन बंद हुआ। फिर क्या था, अपनी कंपनी के सिग्नल को इतना गरियाया कि सुनने वाले भी कह बैठे-साहब संभल के, दीवारों के भी कान होते हैं। कोई सुन न ले।
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