{"_id":"24da9616753e409226f5374821c8491f","slug":"gossip-about-forest-office-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जनाब का तो नसीब ही छिन गया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जनाब का तो नसीब ही छिन गया
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 28 Oct 2014 11:13 AM IST
विज्ञापन
उत्तराखंड
विज्ञापन
वन विभाग के एक बड़े अधिकारी, एक महीने पहले तक तो खूब रौब गालिब करते थे।
आखिर तीन तीन कुर्सियों के अकेले मालिक जो ठहरे थे।
सरकार की चापलूसी में भी कोई कमी नहीं थी। इस बात का विश्वास भी था कि उनकी पावर बनी रहेगी लेकिन एक दिन सरकार ने अपनी दिखाई तो जनाब ने मुंह की खाई। दो कुर्सियां जाती रही।
अब साहब को कोई पूछने वाला नहीं रहा। बेचारे अकेले एक कुर्सी पर बैठे-बैठे पछताते रहते हैं कि क्या वो घड़ी थी। जिन तीन कुर्सियों की पावर में उन्होंने अपने मातहतों को कुछ नहीं समझा, आज वह उन्हें कुछ नहीं समझ रहे हैं। आखिर उन्हें नया बॉस जो मिल गया है।
सरकार की चापलूसी में भी कोई कमी नहीं थी। इस बात का विश्वास भी था कि उनकी पावर बनी रहेगी लेकिन एक दिन सरकार ने अपनी दिखाई तो जनाब ने मुंह की खाई। दो कुर्सियां जाती रही।
अब साहब को कोई पूछने वाला नहीं रहा। बेचारे अकेले एक कुर्सी पर बैठे-बैठे पछताते रहते हैं कि क्या वो घड़ी थी। जिन तीन कुर्सियों की पावर में उन्होंने अपने मातहतों को कुछ नहीं समझा, आज वह उन्हें कुछ नहीं समझ रहे हैं। आखिर उन्हें नया बॉस जो मिल गया है।