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इंसाफ के लिए बहन ने रोकी सीएम की फ्लीट
ब्यूरो / अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Mon, 17 Nov 2014 04:53 PM IST
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भाई की हत्यारों को सजा दिलाने के लिए भटक रही एक बहन ने उत्तराखंड के सीएम की फ्लीट रोक दी।
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इससे थोड़ी देर के लिए अफरातफरी मच गई, लेकिन बहन ने नम आंखों और रुंधे गले से मुख्यमंत्री हरीश रावत को अपना दुखड़ा सुनाया और इंसाफ की मांग की। मुख्यमंत्री ने बकायदा गाड़ी रोककर डिटेल नोट किया और कार्रवाई का आश्वासन भी दिया।
22 जून 2011 को हुई थी हत्या
बता दें कि बनबसा के भजनपुर निवासी फकीर राम के पुत्र राजेश टम्टा की 22 जून 2011 को हत्या कर दी गई थी। राजेश तांगा चलाता था। उसकी बहन मोनू के अनुसार 22 जून की शाम को पांच-छह परिचित लोग मेरे भाई को घर से बुलाकर ले गए थे। उसके बाद भाई घर नहीं लौटा।
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इंसाफ के लिए दर-दर भटक रही शांतिनगर बिंदुखत्ता निवासी बहन मोनू आर्या को जानकारी मिली कि मुख्यमंत्री हरीश रावत पीलीकोठी स्थित बैंक्वेंट हाल आ रहे हैं। इस पर वह वहां पहुंच गई। मुख्यमंत्री जैसी ही गाड़ी में बैठकर निकले, मोनू उन्हें रोकने को आगे बढ़ी।
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सुरक्षा कर्मियों ने मोनू को हटाया तो उसने रोना-चीखना शुरू कर दिया और उसने मुख्यमंत्री को रुकने का इशारा किया। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने फ्लीट रुकवा दी। मोनू ने भाई की हत्या के बारे में मुख्यमंत्री को बताया और मामले की सीबीसीआईडी जांच कराने की मांग की।
मुख्यमंत्री ने मोनू से पूरा विवरण पूछकर नोट किया। साथ ही कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इसके बाद मुख्यमंत्री आगे बढ़े। सीएम के जाने के बाद मोनू ने बताया कि उसके भाई का शव 22 जून 11 को रात आठ बजे रेल की पटरी के पास पड़े होने की सूचना आई। पटरी के पास ही उसकी बाइक भी मिली।
सुनियोजित तरीके से की थी हत्या
जहां पर मेरे भाई का शव पड़ा था उससे ही कुछ दूरी पर उन लोगों का घर था, जो मेरे भाई को बुलाकर ले गए थे। उनका कहना है कि पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर पांच-छह लोगों को गिरफ्तार किया। बाद में वे सब छूट गए। मोनू ने कहा कि राजेश की हत्या सुनियोजित तरीके से करने के साथ ही साक्ष्य मिटाए गए।
इसमें पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध है। हत्या वाले दिन भाई की एक चप्पल घटनास्थल पर मिली, दूसरी गायब थी। उनका आरोप है कि मौके पर मिली चप्पल को भी गायब कर दिया गया। इसके बाद से हत्या की जांच ठंडे बस्ते में चली गई। मोनू को भाई की हत्या के कारण का भी पता नहीं है।