एवरेस्ट फतह करने के लिए पूजा ने टाली बोर्ड परीक्षा
सियाचिन की पहाड़ी फतह करने वाली तैलीहाट गांव निवासी पूजा मेहरा के लिए रॉक क्लाइंबिंग का जुनून ही सबकुछ है।
उत्तराखंड की इस बेटी की अगली चुनौती एवरेस्ट फतह की है। इस चुनौती के लिए पूजा की तैयारी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने इस वर्ष इंटरमीडिएट की परीक्षा नहीं देने का निर्णय लिया है। पूजा कहती हैं कि पहले एवरेस्ट बाद में इंटरमीडिएट। पूजा के इस निर्णय को पर्वतारोहियों और क्षेत्र के लोगों ने सराहा है।
ब्लॉक के तैलीहाट गांव निवासी पूजा मेहरा राजकीय बालिका इंटर कालेज पाये में 12वीं की छात्रा हैं। पूजा को बचपन से ही पहाड़ चड़ने का शौक था। प्राथमिक पढ़ाई के बाद राजकीय बालिका इंटर कालेज पाये में दाखिला लेते ही उन्होंने एनसीसी ज्वाइन की।
स्कूल की एनसीसी की शिक्षिका दया रावत ने उनकी प्रतिभा को देखकर उनका चयन एनसीसी की ओर ओर से होने वाले पर्वतारोहण अभियान के लिए किया। पूजा ने बताया कि बीती 11 जनवरी को देश भर के 10 एनसीसी के कैडेट सियाचिन फतह करने को निकले।
इनमें उत्तराखंड से वह अकेली कैडेट थीं। सियाचिन फतह कर घर लौटी पूजा ने बताया कि एवरेस्ट चढ़ने के लिए वह एक मार्च को दिल्ली और फिर वहां से दो मार्च को नेपाल जाएंगी। पूजा ने बताया कि तीन मार्च से बोर्ड परीक्षाएं हैं, ऐसे में मुझे एवरेस्ट और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं में से एक को चुनना था।
यह थोड़ा मुश्किल फैसला था लेकिन माता-पिता से मशविरा करने के बाद मैंने एवरेस्ट को चुना है। पूजा की माता गीता मेहरा और पिता चंदन सिंह मेहरा ने भी बेटी के निर्णय को सराहते हुए कहा कि बेटी की इच्छा को हम नहीं रोक सकते। चंदन सिंह मेहरा कहते हैं कि पढ़ने-लिखने की उम्र नहीं होती है।
बेटी एवरेस्ट फतह कर लेगी तो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए उसका नाम जुड़ जाएगा। युवाओं और बच्चों के लिए पूजा का संदेश है कि स्कूल और कॉलेज टाइम पर हर बच्चे को एनसीसी ज्वाइन करनी चाहिए।